crossorigin='anonymous' src='https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1553308877182847'/> महाराष्ट्र किल्ले व स्थळे यांची माहिती Forts and places in maharashtra: जामगाव भुईकोट किला | Jamgav Bhuikot Killa | Jamgaon Fort Information in Hindi

शुक्रवार, २ ऑक्टोबर, २०२६

जामगाव भुईकोट किला | Jamgav Bhuikot Killa | Jamgaon Fort Information in Hindi

 जामगाव भुईकोट किला | Jamgav Bhuikot Killa | Jamgaon Fort Information in Hindi

जामगाव भुईकोट किला | Jamgav Bhuikot Killa | Jamgaon Fort Information in Hindi


महाराष्ट्र के ऐतिहासिक किलों का इतिहास देखा जाए तो पहाड़ी किलों के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण भुईकोट किले भी पाए जाते हैं। अहिल्यानगर जिले के पारनेर तालुका में स्थित जामगाव भुईकोट किला ऐसी ही ऐतिहासिक वास्तुओं में से एक है।

जामगाव गांव के पास स्थित यह किला शिंदे घराने के इतिहास से जुड़ा हुआ है। किले के विस्तृत परिसर में किलेबंदी, बुर्ज, दरवाजे, प्राचीन मंदिर, मस्जिद, वाड़ा और पुरानी वास्तुओं के अवशेष देखने को मिलते हैं। वर्तमान में किले के परिसर में रयत शिक्षण संस्था का कृषि पॉलिटेक्निक कॉलेज तथा डी.एड. कॉलेज कार्यरत है।

जामगाव भुईकोट किला कहाँ है?

जामगाव भुईकोट किला अहिल्यानगर जिले के पारनेर तालुका में जामगाव गांव के पास स्थित है। पारनेर से यह किला लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर है।

किला जामगाव के पास स्थित एक पहाड़ी से लगा हुआ बनाया गया है। किले की एक ओर की किलेबंदी पहाड़ी के किनारे से लगी हुई दिखाई देती है।

जामगाव भुईकोट किले का क्षेत्रफल

जामगाव का यह भुईकोट किला लगभग 86 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ बताया जाता है। किले में कुल 20 बुर्ज और चार दरवाजे होने की जानकारी मिलती है। इनमें से वर्तमान में तीन दरवाजे बंद हैं और एक ओर से किले में प्रवेश किया जा सकता है।

किले की किलेबंदी आज भी कई स्थानों पर अच्छी स्थिति में दिखाई देती है।

जामगाव भुईकोट किला | Jamgav Bhuikot Killa | Jamgaon Fort Information in Hindi


जामगाव किले तक कैसे जाएं?

अहिल्यानगर मार्ग से

अहिल्यानगर से भालवणी गांव की दिशा में जाना चाहिए। आगे पारनेर रोड पर जाते समय जामगाव गांव आता है। जामगाव के पास ही भुईकोट किला स्थित है।

पुणे से जामगाव किला

पुणे से शिक्रापुर – रांजणगाव – शिरूर – पारनेर मार्ग से यात्रा की जा सकती है। पारनेर से भालवणी की दिशा में जाने के बाद जामगाव किले तक पहुंचा जा सकता है।

मुंबई से

मुंबई से लोणावला – चाकण – शिक्रापुर – शिरूर – पारनेर मार्ग लेकर आगे जामगाव की ओर जा सकते हैं।

टाकळी ढोकेश्वर मार्ग से

कल्याण–अहिल्यानगर मार्ग पर स्थित टाकली ढोकेश्वर गांव से पारनेर की ओर जाने वाला मार्ग है। इस मार्ग से जामगाव किले तक पहुंचा जा सकता है।

पारनेर से जामगाव किला दूरी: लगभग 12 किमी

कल्याण से जामगाव दूरी: लगभग 203 किमी

यात्रा करने से पहले वास्तविक सड़क की वर्तमान स्थिति और स्थानीय मार्गदर्शन की जांच करना उचित रहेगा।

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जामगाव किले में स्थित वास्तुएं

जामगाव गांव से किले की ओर जाते समय मुख्य सड़क से एक कच्चा रास्ता किले की दिशा में जाता है। इस रास्ते से आगे जाने पर दोनों ओर पुरानी वास्तुओं के अवशेष दिखाई देते हैं।

ऐसा बताया जाता है कि पुराना जामगाव गांव किले के परिसर में बसा हुआ था। पुरानी किलेबंदी के कुछ हिस्से अब नष्ट हो चुके हैं। इस परिसर में आगे एक विस्तृत वाड़ा देखने को मिलता है।

राम मंदिर

किले के परिसर में प्रवेश करते समय बाईं ओर राम मंदिर दिखाई देता है। मंदिर की रचना चौकोर है और उसके ऊपर शिखर है।

मंदिर में श्रीराम, लक्ष्मण और सीता की मूर्तियां हैं। वर्तमान में इस मंदिर की ओर कुछ हद तक उपेक्षा दिखाई देती है।

हनुमान मंदिर

राम मंदिर के पास ही एक छोटा हनुमान मंदिर है। यह मंदिर किले के परिसर में स्थित प्राचीन धार्मिक वास्तुओं में से एक है।

विठ्ठल मंदिर

राम मंदिर के आगे कुछ दूरी पर विठ्ठल मंदिर देखने को मिलता है। किले की पुरानी वास्तुओं में इस मंदिर का भी समावेश है।

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तीन कमानी मस्जिद

किले के परिसर में तीन कमानों वाली मस्जिद देखने को मिलती है। तीन कमान होने के कारण इसे स्थानीय स्तर पर तीन कमानी मस्जिद कहा जाता है।

वाड़े के दूसरी ओर ईंटों से बना एक और छोटा पुराना मुस्लिम प्रार्थना स्थल भी दिखाई देता है।

ये वास्तुएं जामगाव की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत की विविधता की याद दिलाती हैं।

वाड़े का मुख्य प्रवेशद्वार

तीन कमानी मस्जिद से आगे जाने पर वाड़े का मुख्य प्रवेशद्वार दिखाई देता है। मुख्य दरवाजा दोनों ओर के बुर्जों के बीच बनाया गया है।

मुख्य प्रवेशद्वार के नीचे की ओर एक चोर दरवाजा भी होने का दिखाई देता है।

किले के परिसर में वर्तमान में महाविद्यालयीन उपयोग होने के कारण कुछ भाग शैक्षणिक कार्यों के लिए उपयोग किया जाता है।

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पहरेदारों की देवड़ियां

मुख्य प्रवेशद्वार से किले में प्रवेश करने के बाद पहरेदारों के लिए बनाई गई देवड़ियां देखने को मिलती हैं।

आज भी इस भाग की रचना काफी हद तक सुरक्षित है। इससे किले की सुरक्षा व्यवस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है।


पागा

चोर दरवाजे से आगे जाने पर बाईं ओर घोड़ों को बांधने के लिए उपयोग की जाने वाली पागा के अवशेष दिखाई देते हैं।

ऐतिहासिक काल में घुड़सवार सेना के महत्व को देखते हुए किले के परिसर में स्थित पागा एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।


जामगाव किले का वाड़ा

किले के परिसर का प्रमुख आकर्षण विस्तृत वाड़ा है।

पेड़-पौधों और झाड़ियों के बीच से आगे जाने पर आठ सीढ़ियां चढ़कर वाड़े के हिस्से में पहुंचा जा सकता है। यह वाड़ा दो मंजिला है और इसमें कई कमरे हैं।

वर्तमान में इस परिसर में रयत शिक्षण संस्था का कृषि पॉलिटेक्निक कॉलेज और डी.एड. कॉलेज चलता है।

वाड़े के निर्माण में विशेष नक्काशी का काम बड़े पैमाने पर दिखाई नहीं देता। कुछ हिस्सों में ईंटों का उपयोग किया गया दिखाई देता है। वाड़े के बाहरी हिस्से में एक विशाल कुआं भी है।

जामगाव किले के बुर्ज

जामगाव भुईकोट किले में कुल 20 बुर्ज होने की जानकारी दी जाती है। कई बुर्ज आज भी मजबूत अवस्था में खड़े हैं।

बुर्ज पर जाने के लिए किलेबंदी की ओर सीढ़ियों की व्यवस्था की गई है।

किले की किलेबंदी में जगह-जगह जंग्या देखने को मिलती हैं।

जंग्या क्या होती हैं?

किले की किलेबंदी में शत्रु पर हमला करने के लिए बनाई गई छोटी चौकोर या संकरी खांचों को जंग्या कहा जाता है।

इन जंग्यों से सैनिक बाहरी क्षेत्र पर नजर रखते हुए शत्रु पर हमला कर सकते थे।

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जामगाव भुईकोट किले का इतिहास

जामगाव भुईकोट किले का संबंध शिंदे घराने से जोड़ा जाता है।

पेशवाओं के काल में राणोजी शिंदे बाजीराव पेशवा के सहयोगी थे। राणोजी शिंदे के वंशजों के साथ जामगाव की इस वास्तु का संबंध होने की बात कही जाती है।

राणोजी शिंदे के पांच पुत्र थे। उनमें से पांचवें पुत्र महादजी शिंदे थे। महादजी शिंदे के काल में इस परिसर के वाड़े का निर्माण और मरम्मत किए जाने की बात कही जाती है।

महादजी शिंदे

महादजी शिंदे मराठा इतिहास के एक महत्वपूर्ण सेनानी थे। ई.स. 1761 के पानीपत के तीसरे युद्ध में वे घायल हुए थे।

पानीपत के बाद उत्तर भारत में मराठों की राजनीतिक और सैन्य स्थिति को फिर से मजबूत करने में महादजी शिंदे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने यूरोपीय, विशेष रूप से फ्रांसीसी सैन्य प्रशिक्षण का उपयोग करके आधुनिक पद्धति की सेना तैयार की। उत्तर भारत में मराठों का प्रभाव बढ़ाने में उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है।

महादजी शिंदे का निधन ई.स. 1794 में हुआ।

नोट: महादजी शिंदे के जीवन की घटनाओं और जामगाव वाड़े के निर्माण के सटीक कालखंड के संबंध में स्थानीय परंपराओं और विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों में अंतर पाया जा सकता है। इसलिए अध्ययनपूर्ण लेखन के लिए उपलब्ध पुरातात्विक और ऐतिहासिक स्रोतों का संदर्भ लेना उचित होगा।

किले पर रहने की व्यवस्था

जामगाव किले पर पर्यटकों के लिए अलग से रहने की व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।

किले के परिसर का शैक्षणिक उपयोग होने के कारण स्थानीय नियमों का पालन करते हुए ही परिसर का भ्रमण करना चाहिए।

भोजन की व्यवस्था

किले पर विशेष भोजन की व्यवस्था नहीं है। पारनेर में भोजन की व्यवस्था की जा सकती है।

पीने का पानी

किले पर पर्यटकों के लिए अलग से पीने के पानी की व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने के कारण यात्रा के दौरान अपना पानी साथ रखना उचित है।

जामगाव किला देखने में कितना समय लगता है?

किले के बाहरी परिसर को देखने के लिए लगभग आधे घंटे से एक घंटे का समय पर्याप्त हो सकता है। हालांकि वाड़ा और अन्य वास्तुएं देखने के लिए अधिक समय लग सकता है।

किले के परिसर में महाविद्यालय शुरू होने के कारण वहां के नियमों का पालन करना और संबंधित लोगों से अनुमति लेना आवश्यक है। रविवार को महाविद्यालय में छुट्टी होने के कारण परिसर देखने के लिए अपेक्षाकृत उचित समय हो सकता है; हालांकि प्रत्यक्ष यात्रा से पहले प्रवेश की अनुमति उपलब्ध है या नहीं, यह स्थानीय स्तर पर जांच लेना चाहिए।

जामगाव भुईकोट किले पर क्या देख सकते हैं?

जामगाव किले की यात्रा के दौरान निम्नलिखित ऐतिहासिक वास्तुएं देखी जा सकती हैं:

- भुईकोट किले की किलेबंदी - 20 बुर्ज - मुख्य प्रवेशद्वार - चोर दरवाजा - पहरेदारों की देवड़ियां - घोड़ों की पागा - विस्तृत वाड़ा - राम मंदिर - हनुमान मंदिर - विठ्ठल मंदिर - तीन कमानी मस्जिद - पुराने गांव के भग्न अवशेष - किले के बाहर स्थित कुआं - किलेबंदी पर बनी जंग्या

जामगाव भुईकोट किले की यात्रा करते समय ध्यान रखें

किले के परिसर में वर्तमान में शैक्षणिक संस्थाएं कार्यरत होने के कारण वहां की अनुशासन व्यवस्था और नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण है।

पुरानी वास्तुओं पर चढ़ना, पत्थरों या अवशेषों को नुकसान पहुंचाना, कचरा फेंकना और धार्मिक स्थलों का अपमान करना टालना चाहिए।

किला हमारे इतिहास की धरोहर है, इसलिए उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।

जामगाव भुईकोट किला | Jamgav Bhuikot Killa | Jamgaon Fort Information in Hindi


निष्कर्ष

अहिल्यानगर जिले के पारनेर तालुका में स्थित जामगाव भुईकोट किला शिंदे घराने के इतिहास से जुड़ा हुआ एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक परिसर है। विस्तृत किलेबंदी, बुर्ज, वाड़ा, मंदिर, मस्जिद और पुरानी वास्तुओं के अवशेषों के कारण इतिहास प्रेमियों को यहां कई चीजें देखने को मिलती हैं।

पहाड़ी किलों से अलग प्रकार की संरचना वाला यह भुईकोट किला अहिल्यानगर और पारनेर क्षेत्र के ऐतिहासिक स्थलों के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है।

जामगाव भुईकोट किला – Jamgav Bhuikot Killa – Jamgaon Fort के बारे में यह जानकारी हिंदी भाषा में प्रस्तुत की गई है।

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