crossorigin='anonymous' src='https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1553308877182847'/> महाराष्ट्र किल्ले व स्थळे यांची माहिती Forts and places in maharashtra: एप्रिल 2026

सोमवार, २७ एप्रिल, २०२६

अंबाबरवा वन अभयारण्य (Ambabarva Wildlife Sanctuary)

 अंबाबरवा वन अभयारण्य (Ambabarva Wildlife Sanctuary) 


अंग्रेज़ों के समय यह स्थान ठंडे मौसम के लिए प्रसिद्ध था।

अंबाबरवा वन अभयारण्य (Ambabarva Wildlife Sanctuary)


स्थान

महाराष्ट्र राज्य के विदर्भ क्षेत्र में, बुलढाणा जिले के उत्तर-पूर्व भाग में अंबाबरवा अभयारण्य स्थित है।

स्थापना

9 अप्रैल 1997 को इसे अभयारण्य का दर्जा मिला।

क्षेत्रफल

127.72 वर्ग किलोमीटर

जलवायु

यह उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती (Dry Deciduous) वन क्षेत्र है।

अंबाबरवा वन अभयारण्य (Ambabarva Wildlife Sanctuary)


कैसे पहुँचे

नागपुर निकटतम अंतरराष्ट्रीय शहर है।

नागपुर – अमरावती – अकोट – तुंकी मार्ग से सड़क द्वारा पहुँचा जा सकता है।

शेगांव रेलवे स्टेशन यहाँ से लगभग 60 किमी दूर है। वहाँ से संग्रामपुर होते हुए अभयारण्य पहुँचा जा सकता है।

अंबाबरवा वन अभयारण्य (Ambabarva Wildlife Sanctuary)


वनस्पति (Flora)

सागौन, महुआ, बेल, पीपल, बरगद, आम, नीम, बांस, जामुन, इमली, साल, अंजन, धामन, घोस्ट ट्री आदि वृक्ष यहाँ पाए जाते हैं। विभिन्न प्रकार की जड़ें और कंद भी मिलते हैं।

वन्यजीव (Fauna)

जंगली सूअर, हिरण, बाघ, भौंकने वाला हिरण, चीतल, नीलगाय, सांभर, भालू, बंदर, लंगूर, जंगली कुत्ते (ढोल), उड़ने वाली गिलहरी, मकाक आदि प्राणी यहाँ देखे जा सकते हैं।

पक्षी (Birds)

मोर, कबूतर, तीतर, कठफोड़वा, किंगफिशर, कोयल, जंगल फाउल, काला गरुड़, तोता तथा कई प्रवासी और जल पक्षी यहाँ पाए जाते हैं।

अंबाबरवा वन अभयारण्य (Ambabarva Wildlife Sanctuary)


प्रमुख दर्शनीय स्थल

जटाशंकर जलप्रपात

अंबाबरवा वन अभयारण्य (Ambabarva Wildlife Sanctuary)


यह जलप्रपात भगवान शिव की जटाओं जैसा दिखता है, इसलिए इसे जटाशंकर कहा जाता है। यह पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण है।

पिंपलडोह किला

अंबाबरवा वन अभयारण्य (Ambabarva Wildlife Sanctuary)


जंगल के अंदर स्थित यह किला अब काफी खंडहर हो चुका है। संभवतः इसे गोंड या कोरकू जनजातियों ने बनाया था।

तीन दगड़ टॉप (तीन पत्थर शिखर)

महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश सीमा पर स्थित यह क्षेत्र अभयारण्य का सबसे ऊँचा भाग है। यहाँ से सुंदर दृश्य दिखाई देता है। यहाँ बौद्ध अवशेष भी मिले हैं।

सोनबर्डी बांध

यह जलाशय वन्यजीवों के लिए पानी का मुख्य स्रोत है और सिंचाई के लिए भी उपयोगी है।

अंबाबरवा वन अभयारण्य (Ambabarva Wildlife Sanctuary)


हडिया महल

यह क्षेत्र वन्यजीव निरीक्षण के लिए जाना जाता है।

असलदरी और अंबाबारी

ये मुख्य वन क्षेत्र हैं जहाँ वन्यजीव और पक्षियों का निवास है।

धूलघाट

यहाँ घास का क्षेत्र अधिक है, जहाँ नीलगाय, हिरण और सांभर जैसे शाकाहारी जानवर चरने आते हैं।

अंबाबरवा वन अभयारण्य (Ambabarva Wildlife Sanctuary)


घूमने का सर्वोत्तम समय

जुलाई से सितंबर: हरियाली देखने के लिए अच्छा, लेकिन बारिश से परेशानी हो सकती है।

अक्टूबर से फरवरी: सबसे अच्छा समय, पक्षी दर्शन के लिए उपयुक्त।

मार्च से मई: जल स्रोतों के पास जानवर देखने का अवसर मिलता है।

ठहरने की सुविधा

वन विभाग द्वारा बनाए गए विश्राम स्थल उपलब्ध हैं। पिंपलाद गांव के पास भी गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं।

अंबाबरवा वन अभयारण्य (Ambabarva Wildlife Sanctuary)


यात्रा के दौरान सावधानियाँ

स्थानीय गाइड साथ रखना बेहतर है।

प्लास्टिक का उपयोग न करें, पर्यावरण स्वच्छ रखें।

जानवरों को परेशान न करें, शोर न करें।

निर्धारित मार्ग से बाहर न जाएँ।

वाहन से नीचे न उतरें।

सफारी के लिए जिप्सी या कैंटर का उपयोग करें।

फोटोग्राफी के लिए कैमरा उपयोग करें, मोबाइल का कम उपयोग करें।

यह अंबाबरवा वन अभयारण्य की संपूर्ण जानकारी l ambabarva abhyarany 

Ambabarwa Wildlife Sanctuary – Information

 Ambabarwa Wildlife Sanctuary – Information  


During the British era, Ambabarwa was known as a hill station with a cool climate.


अंबाबरवा वन अभयारण्य (Ambabarva Wildlife Sanctuary)


Location

Ambabarwa Wildlife Sanctuary is located in the north-eastern part of Buldhana district in the Vidarbha region of Maharashtra, India.


Establishment

It was declared a wildlife sanctuary on 9 April 1997.

Area

127.72 square kilometers

Climate

The sanctuary has a tropical dry deciduous forest climate.

अंबाबरवा वन अभयारण्य (Ambabarva Wildlife Sanctuary)

अंबाबरवा वन अभयारण्य (Ambabarva Wildlife Sanctuary)


How to Reach

Nagpur is the nearest international city.

It can be reached by road via Nagpur – Amravati – Akot – Tunki route.

Shegaon is the nearest railway station, located about 60 km away. From there, one can reach the sanctuary via Sangrampur.

Flora

The sanctuary is rich in vegetation such as teak, mahua, wood apple, peepal, banyan, bael, anjan, temru, dhaman, katak, mango, sal, neem, ghost tree, haldu, bamboo, jamun, tamarind, and various tuber plants.

अंबाबरवा वन अभयारण्य (Ambabarva Wildlife Sanctuary)


Fauna

Animals found here include wild boar, deer, tiger, barking deer, chital, nilgai, sambar, bear, monkeys, langurs, wild dogs (dhole), snakes, flying squirrel, and macaque.

Birds

Bird species include peacock, pigeon, partridge, barbet, woodpecker, kingfisher, cuckoo, jungle fowl, black eagle, parrot, along with many migratory and water birds.

अंबाबरवा वन अभयारण्य (Ambabarva Wildlife Sanctuary)


Major Attractions

Jatashankar Waterfall

Located in the central zone of the sanctuary, this waterfall resembles the matted hair (jata) of Lord Shiva, hence the name. It is a major tourist attraction.


अंबाबरवा वन अभयारण्य (Ambabarva Wildlife Sanctuary)

Pimpaldoh Fort
अंबाबरवा वन अभयारण्य (Ambabarva Wildlife Sanctuary)


Situated within the forest, this fort is now in ruins. It is believed to have been built by Gond or Korku tribes.

Three Stones Point (Teen Dagad Top)

This is the highest point in the sanctuary, located on the Maharashtra–Madhya Pradesh border. It offers a panoramic view of the forest and has some Buddhist remains.


Sonbardi Dam

A large reservoir within the sanctuary that fulfills the water needs of wildlife and is also useful for irrigation.

Hadiya Mahal

A well-known observation point within the sanctuary.

Asaldari and Ambabari

These are core forest areas important for wildlife and bird habitats.

Dhulghat

A region with sparse forest and grasslands, where herbivores like nilgai, deer, and sambar come to graze.


Best Time to Visit

July to September: Lush greenery during monsoon, but travel may be difficult due to rains.

October to February: Best time to visit, ideal for bird watching including migratory species.

March to May: Good for spotting animals near water sources.

अंबाबरवा वन अभयारण्य (Ambabarva Wildlife Sanctuary)


Accommodation

Forest department rest houses are available for visitors. Guest houses are also available near Pimpalad village, from where jungle safaris can be enjoyed.

Precautions for Visitors

Hiring a local guide is recommended.

Avoid carrying plastic bottles or bags; use eco-friendly materials.

Do not make noise or disturb animals.

Stay on designated paths and do not venture deep into the forest.

Do not get down from the vehicle during wildlife viewing.

Use vehicles like jeeps or canters for safaris.

Prefer cameras for photography instead of mobile phones.

This is the complete information about Ambabarwa Wildlife Sanctuary.

अंबाबरवा वनअभयारण्य / ambabarva abhyarany

 अंबाबरवा वनअभयारण्य / ambabarva abhyarany

• इंग्रजांच्या काळात थंड हवेचे ठिकाण म्हणून अंबाबरवा स्थळ प्रसिद्ध होते.

अंबाबरवा वनअभयारण्य / ambabarva abhyarany


• स्थान :

महाराष्ट्र राज्यातील विदर्भ विभागात बुलढाणा जिल्ह्याच्या उत्तर पूर्व विभागात अंबाबरवा अभयारण्य आहे.

• स्थापना : ९ एप्रिल १९९७ साली अंबाबरवा अभयारण्य म्हणून मान्यता मिळाली.

• क्षेत्रफळ : १२७. ७२ चौ. किलोमीटर.

• अभयारण्यातील हवामान : 

उष्ण कटिबंधीय कोरडे पानझडी स्वरूपाचे हे अरण्य आहे.

अंबाबरवा वनअभयारण्य / ambabarva abhyarany


अभयारण्य पहायला जाण्यासाठी प्रवासी मार्ग :

• नागपूर हे जवळील आंतरराष्ट्रीय ठिकाण आहे.

• नागपूर – अमरावती – अकोट – तुंकी मार्गे आंबा बरवा रस्ते मार्गे जाता येते.

• शेगाव जवळील रेल्वे स्टेशन ६० किलोमीटर अंतरावर आहे येथून संग्रामपूर मार्गे अंबाबरवा अभयारण्य पहायला जाता येते.

अंबाबरवा वनअभयारण्य / ambabarva abhyarany


• वनस्पती जीवन : सागवान, मोह, कवठ, पिंपळ, वड, बेल, अंजन, टेमारु, धामण, कटक, आंबा, साल, कडूलिंब, घोस्ट ट्री, हळदू, बांबू, जांभळं , चिंच हे वृक्ष वेगवेगळी कंदमुळे देखील आढळतात.

• प्राणी जीवन : रानडुक्कर, हरिण, वाघ, भुंकणारे हरिण, चितळ, नीलगाय, सांभर, अस्वल, रोही, माकडे, लंगूर, ढोल, साप, अस्वल, चितळ, उडणारी खार, मकाक यासारखे प्राणी येथे पहायला मिळतात.

• पक्षी : मोर, पारवा, तितर, तांबट, सुतारपक्षी, खंड्या, कोकिळ, रानकोंबड्या, कृष्ण गरुड , पोपट, व अन्य स्थलांतरित पक्षी व पाणपक्षी येथे पहायला मिळतात.

अंबाबरवा वनअभयारण्य / ambabarva abhyarany


अभयारण्यात पाहण्यासारख स्थळे :

• जटाशंकर धबधबा :

अभयारण्यात मध्य परिक्षेत्रात असणारा हा धबधबा, शंकराच्या जटे सारखा जलप्रपात होतो . म्हणून त्यास जटाशंकर म्हटले जाते. पर्यटकांचे खास आकर्षण आहे.

अंबाबरवा वनअभयारण्य / ambabarva abhyarany


• पिंपळडोह किल्ला :

• अरण्यात पिंपळडोह असणारा किल्ला. बरीच पडझड झालेली आहे. काही अवशेष शिल्लक आहेत. विशेषत गोंड अथवा कोरकू आदिवासींनी बांधला असावा.

अंबाबरवा वनअभयारण्य / ambabarva abhyarany


• तीन दगड टॉप :

महाराष्ट्र - मध्यप्रदेश सीमेवर असणारा अरण्यातील सर्वात उंच भाग यास तीन दगड म्हंटले जाते. येथून अभयारण्याचे विहंगम दर्शन होते. येथे बुध धर्मीय बांधकाम आढळते.

• सोनबर्डी धरण : अभयारण्य परिसरात मोठे सोनबर्डी धरण पाणलोट क्षेत्र आहे. जे अरण्यातील प्राण्यांची पिण्याची गरज भागवते. तसेच जलसिंचनासाठी हा प्रकल्प उपयुक्त आहे.

• हडिया महाल : अभयारण्य परिसरातील एक निरीक्षण क्षेत्र म्हणून हडिया महाल ओळखले जाते.

• असलदरी, अंबाबारी : अभयारण्य परिसरात प्राणी निरिक्षणासाठी व अरण्याची मुख्य वन क्षेत्र म्हणून तसेच प्राणी पक्षी आदिवास ठिकाणे असलदरी, अंबाबारी होत.

• धूळघाट : विरळ जंगल, गवत मुख्य प्रमाणात येथे वाढते. शाकाहारी प्राणी विशेषत गवा, नीलगाय, हरणे, सांबरे या परिसरात गवत खाण्यासाठी येतात.

अंबाबरवा वनअभयारण्य / ambabarva abhyarany


अभयारण्य पाहणी करण्यासाठी योग्य काळ :

• जुलै ते सप्टेंबर पावसाळी निसर्ग पाहता येतो. पण पावसामुळे गैरसोय होते.

• ऑक्टोबर ते फेब्रुवारी हा अभयारण्य पहायला उत्तम काळ आहे. अनेक पक्षी निरीक्षण करता येतात. विणीच्या हंगामात येथे स्थलांतरित पक्षी येतात.

• मार्च ते मे फक्त पाणवठा परिसरात प्राणी निरीक्षण करता येते.

• अभयारण्य पाहणी करण्यासाठी आलेल्या लोकांना राहण्यासाठी वन विभागाद्वारे निर्मित विश्रांती क्षेत्र आहेत. तसेच किले पिंपलाद गावाजवळ थोड्या अंतरावर गेस्ट हाऊस आहेत. या परिसरातून जंगल सफरीचा आनंद लुटता येतो.

अंबाबरवा वनअभयारण्य / ambabarva abhyarany


अभयारण्य पाहणी करताना घ्यावयाची काळजी :

• परिसरातील माहितीगार गाईड असणे उत्तम.

• प्लॅस्टिक बॉटल, प्लास्टिक पिशवीतील खाद्य पदार्थ नेऊन प्रदूषण करू नये. कापडी किंवा कागदी पिशवी वापरणे उत्तम आहे.

• प्राणी निरीक्षण करताना कोणताही आवाज करू नये. त्यांना स्पर्श करू नये.

• अभयारण्य पाहणी मार्गावरून आड बाजूला जास्त घुसू नये. टेहळणी मार्गावरून दुर्बिणीतून पाहणे उत्तम.

• प्राणी पाहताना वापरल्या जाणाऱ्या गाडीतून खाली उतरू नये.

• कॅन्टर, जिप्सी, यासारखी वाहने वापरावीत. ती खूप सोयीची आहेत.

• प्राणी निरीक्षण व फोटो कॅमेऱ्यात घेणे उत्तम. मोबाईल वापरू नये

अशी आहे आंबा बरवा अभयारण्याची माहिती.Ambabarva abhyaranyachi mahiti

गुरुवार, २३ एप्रिल, २०२६

मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प / Melghat Vyaghra Prakalpa

 मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प / Melghat Vyaghra Prakalpa


• स्थान :

महाराष्ट्र राज्य के अमरावती जिले में स्थित सतपुड़ा पर्वत की गाविलगढ़ पर्वत श्रृंखला के दक्षिणी ढलान पर मेलघाट अभयारण्य स्थित है।

मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प / Melghat Vyaghra Prakalpa


• क्षेत्रफल :

इस अभयारण्य का क्षेत्रफल मेलघाट 2768 वर्ग किलोमीटर है।

• इतिहास :

सन् 1974 में यहाँ मौजूद बाघों की संख्या के कारण भारत के चुनिंदा व्याघ्र परियोजनाओं में मेलघाट अभयारण्य को शामिल किया गया।

• जलवायु :

यह उष्णकटिबंधीय शुष्क पतझड़ी (पर्णपाती) क्षेत्र में आता है।

मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प / Melghat Vyaghra Prakalpa


• वनस्पति :

सागौन, हल्दू, बाँस, कवठ, अंजन, मोह, पीपल, बरगद, इमली, साल, धामन, बेल, जामुन, नीम, तेंदूपत्ता, ऐन, धावड़ा, कुसुम, तिवस, आंवला आदि विभिन्न प्रकार के वृक्ष एवं झाड़ियाँ यहाँ पाई जाती हैं।

• प्राणी :

बंगाल टाइगर, भालू, चीतल, भौंकने वाला हिरण, तेंदुआ, जंगली सूअर, भेड़िया, सांभर, नीलगाय, गौर, शेकरू (विशाल गिलहरी), चौसिंगा, ढोल (जंगली कुत्ते), बंदर, लंगूर, लकड़बग्घा, चीता आदि प्राणी यहाँ पाए जाते हैं।

मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प / Melghat Vyaghra Prakalpa


• सरीसृप :

यहाँ विभिन्न प्रकार के सरीसृप पाए जाते हैं जैसे – साँप, धामन, अजगर, गोह (घोरपड़), भारतीय नाग, छिपकली, मेंढक, घोंघा आदि।

• पक्षी :

हर मौसम में विभिन्न प्रकार के प्रवासी पक्षी यहाँ देखने को मिलते हैं। यहाँ 250 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं जैसे – उल्लू, बाज, कबूतर, किंगफिशर, तांबट, कठफोड़वा, गिद्ध और रंग-बिरंगे पक्षी।

अभयारण्य परिसर में देखने योग्य स्थान :

मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प / Melghat Vyaghra Prakalpa


• सेमाडोह :

नदी के किनारे स्थित है तथा यहाँ रहने की सुविधा उपलब्ध है।

• बाल धबधबा / बेबी वॉटरफॉल :

जंगल के मध्य स्थित छोटा लेकिन आकर्षक और सुरक्षित जलप्रपात।

• सीपना नदी :

इस नदी पर सेलू क्षेत्र में बाँध है। कोहा फॉरेस्ट गेट से वन विभाग की अनुमति लेकर प्रवेश किया जा सकता है। यहाँ कोरकू आदिवासी निवास करते हैं।

मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प / Melghat Vyaghra Prakalpa


• झरीघाट :

अरण्य के दक्षिण भाग में स्थित घना जंगल जहाँ बाघों का वास है। यहाँ अवलोकन स्थल और आगे हाय पॉइंट भी है।

• कंदरी बाबा :

यहाँ निरीक्षण हेतु मचान बने हुए हैं।

• बर्डिंग पोंड (पक्षी तलाव) :

यह एक पक्षी अवलोकन केंद्र है जहाँ जलपक्षी और प्रवासी पक्षी देखे जा सकते हैं।

मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प / Melghat Vyaghra Prakalpa


• कोलकस विभाग :

यहाँ हाथी की सवारी से जंगल सफारी का आनंद लिया जा सकता है।

• बेळकुंड ब्रिज :

सुंदर पुल और उसके नीचे बहती नदी का दृश्य अत्यंत मनोहारी है।

• डोलारा बाबा मंदिर :

जंगल में स्थित एक छोटा हिंदू मंदिर।

• वान नदी क्षेत्र :

यह अपेक्षाकृत विरल वन क्षेत्र है जहाँ विशेष रूप से घास खाने वाले प्राणी अधिक मिलते हैं।

• आदिवासी जीवन :

इस जंगल में कई पाड़े (बस्तियाँ) हैं, जहाँ मुख्यतः कोरकू आदिवासी निवास करते हैं।

• पठारी क्षेत्र / सतपुड़ा रेंज :

मध्यप्रदेश की सीमा से लगा यह क्षेत्र घने जंगलों से भरा है और यहाँ शिकार पूर्णतः प्रतिबंधित है।

• गुल्लर घाट :

यह क्षेत्र बाघों के लिए आरक्षित है तथा यहाँ छोटे जलाशय (पाझर तलाव) हैं।

मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प / Melghat Vyaghra Prakalpa


• खटखाली विभाग :

यहाँ विश्राम गृह उपलब्ध हैं और रानीमहल नामक भग्न संरचना देखने को मिलती है।

• मखला, कूकरु, कसाई :

ये प्रमुख निरीक्षण स्थल हैं।

• अन्य प्रमुख स्थान :

नरनाला किला, सेमाडोह, कोलकस, चिखलदरा आदि स्थान भी यहाँ देखे जा सकते हैं।

यातायात मार्ग :

• नागपुर से मेलघाट की दूरी लगभग 250 किलोमीटर है।

• बदनेरा (मध्यप्रदेश) रेलवे स्टेशन से यह लगभग 10 किलोमीटर दूर है।

• चिखलदरा से इसकी दूरी लगभग 32 किलोमीटर है।

मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प / Melghat Vyaghra Prakalpa


घूमने का सर्वोत्तम समय :

• जुलाई से सितंबर : वर्षा ऋतु में प्राकृतिक सौंदर्य देखने योग्य होता है, परंतु यात्रा में कठिनाई हो सकती है।

• अक्टूबर से फरवरी : अभयारण्य भ्रमण के लिए सर्वोत्तम समय, पक्षी अवलोकन के लिए उपयुक्त।

• मार्च से मई : केवल जलस्रोतों के पास वन्यजीव देखे जा सकते हैं।

अभयारण्य में जाते समय सावधानियाँ :

• स्थानीय गाइड साथ रखना उचित है।

• प्लास्टिक बोतल और प्लास्टिक बैग का उपयोग न करें, कपड़े या कागज के बैग का उपयोग करें।

• वन्यजीवों को देखने के दौरान शोर न करें और उन्हें छुएँ नहीं।

• निर्धारित मार्ग से बाहर न जाएँ, दूरबीन का उपयोग करना बेहतर है।

• वाहन से नीचे न उतरें।

• कैंटर, जिप्सी जैसे वाहनों का उपयोग करें।

• फोटो कैमरे से लेना बेहतर है, मोबाइल का उपयोग कम करें।

मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प / Melghat Vyaghra Prakalpa


इस प्रकार मेळघाट व्याघ्र परियोजना के बारे में यह संपूर्ण जानकारी है।melghat vyaghra praklpa 

Melghat Tiger Project

 Melghat Tiger Project


• Location :

Melghat Sanctuary is located on the southern slopes of the Gawilgarh hill range in the Satpura Mountains, in Maharashtra, within Amravati district.

Melghat Tiger Project


• Area :

The total area of this sanctuary is 2768 square kilometers.

• History :

In 1974, due to the presence of a significant number of tigers, Melghat Sanctuary was included among India’s selected tiger projects.

• Climate :

It falls under a tropical dry deciduous region.

Melghat Tiger Project


• Vegetation :

Teak, Haldu, Bamboo, Wood Apple, Anjan, Mahua, Peepal, Banyan, Tamarind, Sal, Dhaman, Bael, Jamun, Neem, Tendu, Ain, Dhawda, Kusum, Tivas, Amla and many other types of trees and shrubs are found here.

• Animals :

Bengal Tiger, bear, chital (spotted deer), barking deer, leopard, wild boar, wolf, sambar, nilgai, gaur, giant squirrel, four-horned antelope, dhole (wild dog), monkeys, langurs, hyena and similar animals are found here.

Melghat Tiger Project


• Reptiles :

Various types of reptiles are found here such as snakes, rat snake, python, monitor lizard, Indian cobra, lizards, frogs and snails.

• Birds :

Different migratory birds can be seen here in every season. More than 250 species are found such as owls, hawks, pigeons, kingfishers, barbets, woodpeckers, vultures and colorful birds.

Melghat Tiger Project


Places to Visit in the Sanctuary :

• Semadoh :

Located near the riverbed and accommodation facilities are available here.

• Baby Waterfall :

Located in the middle of the forest. It is small, attractive and safe for tourists.

Melghat Tiger Project


• Sipna River :

There is a dam on this river in the Selu area. Entry is allowed from Koha Forest Gate with permission from the forest department. Korku tribal settlements are found here.

• Jarighat :

Located in the southern part of the forest. It is a dense forest area with tiger movement. There are observation points and a high point ahead.

• Kandari Baba Area :

Observation watchtowers are available here.

• Birding Pond :

This is a bird-watching center where many water birds and migratory birds can be seen.

Melghat Tiger Project


• Kolkas Region :

Forest safari can be enjoyed on elephant back here.

• Belkund Bridge :

A beautiful bridge with a scenic river flowing beneath it.

• Dolara Baba Temple :

A small Hindu temple located inside the forest.

• Wan River Area :

This is a relatively sparse forest region where many herbivorous animals are found.

Melghat Tiger Project


• Tribal Life :

There are many small settlements in this forest, mainly inhabited by the Korku tribe.

• Plateau Region / Satpura Range :

The area bordering Madhya Pradesh is densely forested. Hunting is strictly prohibited here.

• Gullar Ghat :

This area is reserved for tigers and contains natural water bodies.

• Khatkhali Region :

Rest houses are available here. The ruins of Ranimahal can also be seen.

• Makhala, Kukru, Kasai :

These are important observation points.

• Other Attractions :

Narnala Fort, Semadoh, Kolkas and Chikhaldara are notable places to visit.

Melghat Tiger Project


Transport Routes :

• It is about 250 km from Nagpur.

• It is about 10 km from Badnera railway station.

• It is about 32 km from Chikhaldara.

Best Time to Visit :

• July to September: Scenic monsoon season, but travel may be difficult.

• October to February: Best time to visit; ideal for bird watching.

• March to May: Wildlife can mostly be seen near water sources.

Melghat Tiger Project


Precautions While Visiting :

• It is advisable to have a knowledgeable local guide.

• Avoid carrying plastic bottles or bags; use cloth or paper bags.

• Do not make noise while observing animals and do not touch them.

• Do not leave designated paths; use binoculars for viewing.

• Do not get down from the vehicle during wildlife viewing.

• Use vehicles like canter or gypsy.

• Use a camera for photography instead of a mobile phone.

Melghat Tiger Project


This is the complete information about the Melghat Tiger Project.

मेळघाट व्याघ्र प्रकल्प / melghat vyaghra praklpa

 मेळघाट व्याघ्र प्रकल्प / melghat vyaghra praklpa

• स्थान :

महाराष्ट्र राज्यातील अमरावती जिल्ह्यात असलेल्या सातपुडा पर्वताच्या गाविलगड डोंगर रांगेच्या दक्षिण उतारावर मेळघाट अभयारण्य आहे.

मेळघाट व्याघ्र प्रकल्प / melghat vyaghra praklpa


• क्षेत्रफळ : 

या अभयारण्याचे क्षेत्रफळ मेळघाट २७६८ चौरस किलोमीटर आहे

• इसवी सन १९७४ साली येथे असलेल्या व्याघ्र संख्येमुळे भारतातील मोजक्या व्याघ्र प्रकल्पात मेळघाट या अभयारण्याचा समावेश करण्यात आला आहे.

• हवामन : 

 हे उष्ण कटिबंधीय कोरडे पानगळ होणाऱ्या प्रदेशात येते.

मेळघाट व्याघ्र प्रकल्प / melghat vyaghra praklpa


• वनस्पती : सांग, हळदू, बांबू, कवठ, अंजन, मोह, पिंपळ, वड, चिंच, साल, धामण, बेल, जांभूळ, कडुलिंब, तेंडुपत्ता,, ऐन, धावडा, कुसुम, तिवस, आओल, अशी अनेक प्रकारची झाडे व झुडपे आढळतात.

• प्राणी : बंगाल टायगर, अस्वल, चितळ, भुंकणारे हरिण, बिबट्या, जंगली डुक्कर, लांडगे, सांबर, नीलगाय, गवा,शेकरू खार, चौसिंगा, ढोल,माकडे, लंगूर, तरस, चित्ता यासारखे प्राणी आढळतात.

मेळघाट व्याघ्र प्रकल्प / melghat vyaghra praklpa


• सरीसृप :

येथे पुष्कळ स्वरूपाचे सरीसृप आढळतात. साप, धामण, अजगर, घोरपड, भारतीय नाग, सरडे, बेडूक, गोगलगाय.

पक्षी :

प्रत्येक हंगामा नुसार निरनिराळे स्थलांतरित पक्षी येथे पहायला मिळतात. २५० पेक्षा जास्त प्रजाती पहायला मिळतात. घुबड, ससाणे, कबुतर, खंड्या, तांबट, सुतारपक्षी, गिधाडे व रंगीबेरंगी पक्षी येथे पहायला मिळतात.

मेळघाट व्याघ्र प्रकल्प / melghat vyaghra praklpa


अभयारण्य परिसरात पाहण्यासारखी ठिकाणे :

• सेमाडोह : नदीच्या पात्रशेजारी असून राहण्यासाठी या परिसरात सोय होते.

• बाळ धबधबा/ बेबी धबधबा : अरण्यात मध्यभागी आहे. लहान आहे. पर्यटकांना आकर्षक व सुरक्षित आहे.

• सीपना नदी : या नदीवर धरण आहे सेलू परिसरात कोहा फॉरेस्ट गेट आहे. येथून वनखाते परवानगीने आत जाता येते. कोरकू आदिवासी वस्ती आढळते.

• झरीघाट : अरण्याच्या दक्षिण विभागात आहे. येथे घनदाट अरण्य असून वाघांचा वावर असतो. येथे निरीक्षण स्थळे आहेत. येथून पुढे हाय पॉईंट देखील आहे.

मेळघाट व्याघ्र प्रकल्प / melghat vyaghra praklpa


• कंदरी बाबा परिसरात निरीक्षण मचाण आहेत.

• बार्डिंग पौंड ( पक्षी तलाव ) : या परिसरात अनेक पाणपक्षी व स्थानिक अन् स्थलांतरित पक्षी तळ्याशेजारी पहायला मिळतात. हे एक पक्षी निरीक्षण केंद्र आहे.

• कोलकस विभाग : येथे अरण्य सफरीचा आनंद हत्ती वरून मिळतो.

• बेळकुंड ब्रिझ : सुंदर पुल व त्याखालून वाहणारा नदीप्रवाह पाहण्यास आनंददायी आहे.

• डोलारा बाबा मंदीर : येथे एक छोटे हिंदू मंदीर अरण्यात आहे

• वान नदी परिसर : थोडा विरळ जंगल प्रदेश असून अनेक प्रकारचे प्राणी विशेषत गवत खाणारे प्राणी आढळतात.

मेळघाट व्याघ्र प्रकल्प / melghat vyaghra praklpa


• या जंगलात अनेक पाडे आहेत. विशेषत कोरकु आदिवासी मुख्य येथील अरण्याजवळील पाड्यात राहतात.

• पठारी भाग / सातपुडा रेंज प्रदेश : मध्यप्रदेशाला लागून असलेला भाग घनदाट जंगलाचा आहे. येथे शिकार करण्यासाठी बंदी आहे.

• गुल्लर घाट : हा विभाग वाघांसाठी रिझर्व्ह आहे. येथे पाझर तलाव आहेत.

• खटखाली विभाग : या परिसरात रेस्ट हाऊस आहेत. येथे राणीमहाल ही भग्न वास्तू पहायला मिळते.

• मखला, कूकरु, कसाई ही निरीक्षण स्थळे आहेत.

• या अरण्य परिसरात नरनाळा किल्ला, सेमाडोह, कोलकस, चिखलदरा, यासारखी ठिकाणे पहायला मिळतात.

मेळघाट व्याघ्र प्रकल्प / melghat vyaghra praklpa


वाहतूक मार्ग :

• नागपूर येथून २५० किलोमीटर अंतरावर मेळघाट आहे.

• बडनेरा मध्यप्रदेश रेल्वे स्टेशन पासून १० किलोमीटर अंतरावर आहे,

• चिखलदरा येथून ३२ किलोमीटर अंतरावर आहे.

जाण्यासाठी उत्तम काळ :

• जुलै ते सप्टेंबर पावसाळी निसर्ग पाहता येतो. पण पावसामुळे गैरसोय होते.

ऑक्टोबर ते फेब्रुवारी हा अभयारण्य पहायला उत्तम काळ आहे. अनेक पक्षी निरीक्षण करता येतात.

• मार्च ते मे फक्त पाणवठा परिसरात प्राणी निरीक्षण करता येते.

मेळघाट व्याघ्र प्रकल्प / melghat vyaghra praklpa


अभयारण्यात जाताना घ्यावयाची काळजी :

• परिसरातील माहितीगार गाईड असणे उत्तम.

• प्लॅस्टिक बॉटल, प्लास्टिक पिशवीतील खाद्य पदार्थ नेवून प्रदूषण करू नये. कापडी किंवा कागदी पिशवी वापरणे उत्तम आहे.

• प्राणी निरीक्षण करताना कोणतीही आवाज करू नये. त्यांना स्पर्श करू नये.

• अभयारण्य पाहणी मार्गावरून आड बाजूला जास्त घुसू नये. टेहळणी मार्गावरून दुर्बिणीतून पाहणे उत्तम.

• प्राणी पाहताना वापरल्या जाणाऱ्या गाडीतून खाली उतरू नये.

• कॅन्टर, जिप्सी, यासारखी वाहने वापरावीत.

• प्राणी निरीक्षण व फोटो कॅमेऱ्यात घेणे उत्तम. मोबाईल वापरू नये.

मेळघाट व्याघ्र प्रकल्प / melghat vyaghra praklpa


अशी आहे मेळघाट व्याघ्र प्रकल्पाच्या विषयी माहिती.Melghat vyaghra praklpa

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