crossorigin='anonymous' src='https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1553308877182847'/> महाराष्ट्र किल्ले व स्थळे यांची माहिती Forts and places in maharashtra: जुलै 2026

गुरुवार, ३० जुलै, २०२६

Kelve Fort Information | History, How to Reach, Tourist Guide & Places to See

 Kelve Fort Information | History, How to Reach, Tourist Guide & Places to See

Kelve Fort Information | History, How to Reach, Tourist Guide & Places to See


Kelve Fort, also known as Kelva Fort, is a historic coastal fort located near Kelva Beach in Palghar district, Maharashtra. Although much of the fort is now in ruins, its massive walls, triangular bastions, gateways, and old structures still reflect its glorious Portuguese and Maratha history. If you are planning to explore historical forts in Maharashtra, Kelve Fort is worth visiting.

Location of Kelve Fort

Kelve Fort is situated near Kelva village in Palghar district of Maharashtra, India. This is a ground fort (Bhui Kot Fort) built along the Arabian Sea coast. Over the years, sand deposits and tidal action have buried a large portion of the fort. Historically, the fort stood directly on the seashore.

Kelve Fort Information | History, How to Reach, Tourist Guide & Places to See


How to Reach Kelve Fort

Kelve Fort is easily accessible from Mumbai and nearby cities.

- Travel from Mumbai via Vasai Road towards Dhekale village and Tandulwadi to reach Kelva village.

- From Kelva Beach, walk through the area near the Sheetala Devi Temple and the Casuarina grove to reach the fort.

- Mumbai, Vasai, and Kelva are well connected by road and railway.

- Kelva Railway Station is the nearest railway station.

- Mumbai is also an international airport and seaport, making the fort accessible to domestic and international visitors.

Kelve Fort Information | History, How to Reach, Tourist Guide & Places to See


Places to See at Kelve Fort

Main Entrance

Kelve Fort is a ground fort built parallel to the coastline. Visitors first notice a square-shaped entrance gateway that opens into a large courtyard.

Fortification Walls

Most of the fort walls have collapsed over time. However, the thick stone and brick masonry still remains visible. Watch posts, loopholes, and defensive structures can still be identified.

Inner Gateway

Inside the fort, another gateway leads to several rooms. This section is believed to have been the citadel or the main defensive area of the fort.

Triangular Bastions

The fort has four large triangular bastions built on strong foundations. These bastions are considered excellent examples of Portuguese military architecture.

Kelve Fort Information | History, How to Reach, Tourist Guide & Places to See


Interior Rooms

Several rooms can still be seen inside the fort. Some windows and arches remain in good condition. These rooms were likely used as residential quarters, food storage, ammunition stores, kitchens, and administrative areas.

Arched Doorways and Windows

Beautiful arched doorways and decorative windows showcase the architectural style of the period. Although the lower sections are buried under sand, the upper portions still display their original craftsmanship.

Kelve Fort Information | History, How to Reach, Tourist Guide & Places to See


History of Kelve Fort

- Kelve Fort was probably built by the Portuguese during the 15th and 16th centuries to control the nearby sea creek and maritime trade routes.

- During the 17th century, the fort housed around 60 soldiers and 15 cannons.

- On 10 January 1739, Maratha commander Chimaji Appa captured the fort from the Portuguese and incorporated it into the Maratha Empire.

- In 1818, the fort came under British rule after the fall of the Maratha Empire.

- After India's Independence in 1947, the fort became part of independent India.

- During the 2008–09 Vasai Fort conservation campaign, Kelve Fort once again attracted the attention of historians and fort enthusiasts.

- Due to years of neglect and continuous tidal action, much of the fort has been buried under sand, while dense coastal vegetation has spread across the site.

Accommodation

Accommodation is available in Kelva village, where visitors can find hotels, lodges, and homestays.

Food Facilities

Local restaurants and eateries are available in Kelva village, offering food and refreshments.

Drinking Water

There is no drinking water facility inside the fort. Visitors should carry sufficient drinking water or purchase it from Kelva village before visiting.

Time Required to Explore

The fort can be explored comfortably in approximately 15 to 30 minutes.

Travel Tips

- Visit during the morning or evening for pleasant weather.

- Wear comfortable walking shoes.

- Carry drinking water and sun protection.

- Help preserve the fort by avoiding littering or damaging the historic structures.

Kelve Fort Information | History, How to Reach, Tourist Guide & Places to See


Conclusion

Kelve Fort is one of the lesser-known historical coastal forts in Maharashtra. Despite being in ruins, it offers visitors a fascinating glimpse into Portuguese and Maratha history. Its impressive bastions, gateways, ancient rooms, and peaceful surroundings make it an ideal destination for history lovers, photographers, and travelers exploring Palghar district.

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Kelve Fort Information in Hindi | Kelve Kila Palghar | केलवे किले का इतिहास

 

Kelve Fort Information in Hindi | Kelve Kila Palghar | केलवे किले का इतिहास

Kelve Fort Information in Hindi | Kelve Kila Palghar | केलवे किले का इतिहास


केलवे किला (Kelve Fort) महाराष्ट्र के पालघर जिले में स्थित एक ऐतिहासिक समुद्री किला है। यह किला केलवे बीच के निकट स्थित होने के कारण पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यद्यपि आज यह किला काफी हद तक खंडहर में बदल चुका है, फिर भी इसकी मजबूत प्राचीर, बुर्ज, प्रवेश द्वार और प्राचीन स्थापत्य इसकी गौरवशाली विरासत की याद दिलाते हैं।

केलवे किले का स्थान

केलवे किला महाराष्ट्र के पालघर जिले के केलवे गांव के पास स्थित है। यह एक समुद्र किनारे बना भुईकोट (मैदानी) किला है। समय के साथ समुद्र की भरती-ओहोटी तथा रेत के जमाव के कारण किले का निचला भाग काफी हद तक दब गया है। पहले यह किला सीधे समुद्र से लगा हुआ था।

Kelve Fort Information in Hindi | Kelve Kila Palghar | केलवे किले का इतिहास


केलवे किले तक कैसे पहुँचे?

यदि आप मुंबई से आ रहे हैं, तो वसई रोड होते हुए ढेकळे गांव, तांदुळवाडी मार्ग से केलवे गांव पहुँचा जा सकता है। वहां से केलवे बीच के पास स्थित शीतला देवी मंदिर तक पहुँचकर कुछ दूरी पैदल चलने पर यह किला दिखाई देता है।

मुंबई, वसई और केलवे रेलवे मार्ग से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा मुंबई एक अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह भी है, जिससे देश-विदेश के पर्यटक आसानी से यहाँ पहुँच सकते हैं।

केलवे किले में देखने योग्य स्थान

Kelve Fort Information in Hindi | Kelve Kila Palghar | केलवे किले का इतिहास


मुख्य प्रवेश द्वार

यह एक भुईकोट किला है जो समुद्र के समानांतर बनाया गया था। किले के निकट पहुँचने पर सबसे पहले एक चौकोर प्रवेश द्वार दिखाई देता है। इसके भीतर प्रवेश करते ही एक विशाल खुला प्रांगण दिखाई देता है।

प्राचीर (तटबंदी)

किले की अधिकांश प्राचीर आज खंडहर में बदल चुकी है, लेकिन मोटी पत्थर और ईंटों की दीवारें आज भी दिखाई देती हैं। इन दीवारों पर सैनिकों के लिए निगरानी स्थान, तोपों के लिए झरोखे तथा सुरक्षा व्यवस्था के अवशेष देखे जा सकते हैं।

Kelve Fort Information in Hindi | Kelve Kila Palghar | केलवे किले का इतिहास


आंतरिक प्रवेश द्वार

किले के मध्य भाग में एक और प्रवेश द्वार स्थित है। इसके भीतर कई कमरे बने हुए हैं। इतिहासकारों के अनुसार यह भाग संभवतः किले का मुख्य दुर्ग (बालेकिला) रहा होगा।

त्रिकोणाकार बुर्ज

किले के चारों कोनों पर मजबूत त्रिकोणाकार बुर्ज बने हुए हैं। इनका निर्माण पुर्तगालियों द्वारा किया गया माना जाता है। ये बुर्ज समुद्री सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण थे।

किले के अंदर बने कमरे

अंदर प्रवेश करने पर कई कमरे दिखाई देते हैं। कुछ कमरों की खिड़कियाँ और मेहराब आज भी अच्छी स्थिति में हैं। माना जाता है कि इन कमरों का उपयोग सैनिकों के निवास, भोजन, गोला-बारूद तथा अनाज भंडारण के लिए किया जाता था।

मेहराब और झरोखे

किले में जगह-जगह सुंदर मेहराबदार दरवाजे और खिड़कियाँ दिखाई देती हैं। इनसे उस समय की उत्कृष्ट स्थापत्य कला का परिचय मिलता है। नीचे का भाग रेत से दब चुका है, जबकि ऊपर का हिस्सा अभी भी देखा जा सकता है।

Kelve Fort Information in Hindi | Kelve Kila Palghar | केलवे किले का इतिहास


केलवे किले का इतिहास

- माना जाता है कि पुर्तगालियों ने 15वीं से 16वीं शताब्दी के बीच समुद्री खाड़ी पर नियंत्रण रखने के उद्देश्य से इस किले का निर्माण किया। 

- 17वीं शताब्दी में यहाँ लगभग 60 सैनिकों की चौकी तथा 15 तोपें तैनात थीं।

- 10 जनवरी 1739 को मराठा सेनापति चिमाजी अप्पा ने इस किले पर विजय प्राप्त कर इसे मराठा साम्राज्य में शामिल किया।

- वर्ष 1818 में यह किला ब्रिटिश शासन के अधीन चला गया।

- 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद यह किला स्वतंत्र भारत का हिस्सा बना।

- वर्ष 2008-09 में वसई किला अभियान के दौरान इस किले की ओर इतिहास प्रेमियों का फिर से ध्यान गया।

- लंबे समय तक उपेक्षा तथा समुद्री प्रभाव के कारण किले का बड़ा भाग रेत और झाड़ियों से ढक गया है।

ठहरने की सुविधा

केलवे गांव में होटल, लॉज और होमस्टे की सुविधा उपलब्ध है, जहाँ पर्यटक रुक सकते हैं।

भोजन की व्यवस्था

केलवे गांव में स्थानीय भोजनालय और छोटे होटल उपलब्ध हैं, जहाँ भोजन की व्यवस्था की जा सकती है।

पानी की सुविधा

किले के परिसर में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। इसलिए पानी साथ लेकर जाएँ या केलवे गांव से खरीद लें।

किला देखने में कितना समय लगता है?

पूरे किले का भ्रमण करने में लगभग 15 से 30 मिनट का समय लगता है।

यात्रा के लिए सुझाव

- सुबह या शाम के समय भ्रमण करना अधिक उपयुक्त रहेगा।

- समुद्र किनारे होने के कारण आरामदायक जूते पहनें।

- पीने का पानी साथ रखें।

- किले की स्वच्छता बनाए रखें और किसी भी ऐतिहासिक संरचना को नुकसान न पहुँचाएँ।

Kelve Fort Information in Hindi | Kelve Kila Palghar | केलवे किले का इतिहास


निष्कर्ष

केलवे किला महाराष्ट्र के पालघर जिले का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक समुद्री किला है। यद्यपि आज इसका अधिकांश भाग खंडहर में परिवर्तित हो चुका है, फिर भी इसकी प्राचीर, बुर्ज, प्राचीन कमरे और स्थापत्य कला इतिहास की गौरवशाली विरासत को जीवंत बनाए हुए हैं। यदि आप इतिहास, समुद्री किलों और प्राकृतिक सौंदर्य में रुचि रखते हैं, तो केलवे किला अवश्य घूमने जाएँ। 

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Kelve Fort Information in Hindi | Kelve Kila Palghar | केलवे किले का इतिहास



केळवे किल्ल्याची माहिती मराठी भाषेत Kelve killyachi mahiti

 केळवे किल्ल्याची माहिती मराठी भाषेत Kelve killyachi mahiti

केळवे किल्ल्याची माहिती मराठी भाषेत   Kelve killyachi mahiti


स्थान : 

महाराष्ट्र राज्यातील पालघर जवळ केळवे गावाजवळ हा किल्ला स्थित आहे. बाजूची तटबंदी ढासळली आहे. खालील भाग वाळू मातीने मुजलेला आहे. पूर्वी ही जागा समुद्रास लागून होती.


• किल्ल्याकडे जाण्यासाठी प्रवासी मार्ग :

• मुंबई या आंतरराष्ट्रीय ठिकाणापासून वसई रोडने ढेकळे गावातून पुढे तांदुळवाडी मार्गे केळवे गावी व पुढे समुद्र किनाऱ्याने शीतलादेवी मंदिरापासून जवळील झाडीत सुरूच्या बनात हा किल्ला स्थित आहे.

• मुंबई तसेच वसई ही स्थानके रस्ते व रेल्वेद्वारे उर्वरित भारताशी जोडली गेली आहेत. केळवे हे देखील रेल्वेने जोडले आहे.

• मुंबई हे आंतरराष्ट्रीय बंदर आहे. तसेच केळवे बीच हा भाग समुद्राशी जवळ आहे.

• केळवे स्टेशन जवळून केळवे बीच परीसरात शीतलादेवी मंदिरापासून चालत किल्ल्याकडे जाता येते.

केळवे किल्ल्याची माहिती मराठी भाषेत   Kelve killyachi mahiti


• किल्ल्यावर पाहण्यासारखी ठिकाणे :

झाडीतून चालत पुढे आल्यावर आपल्याला पडझड झालेला किल्ला पाहायला मिळतो.

• प्रवेशद्वार : 

हा एक भुईकोट किल्ला आहे. समुद्रास समांतर असा हा किल्ला असून. जवळ गेल्यावर एक चौकोनी दरवाजा पहायला मिळतो. यातून आत प्रवेश केल्यावर विस्तृत आवार आहे.

• तटबंदी : 

• किल्याच्या सभोवती असलेली तटबंदी बरीचशी पडझड झाली आहे. तरी देखील दगड विटांचे जाडसर बांधकाम दिसून येते. त्यामध्ये जागोजागी टेहळणी करण्यासाठी जागा होत्या. त्यांची पडझड झाली आहे. तसेच जागोजागी जंग्या व फांज्या ठेवलेल्या दिसून येतात.

केळवे किल्ल्याची माहिती मराठी भाषेत   Kelve killyachi mahiti


• मध्य प्रवेशद्वार :

मध्यभागी आपल्याला आणखी एक प्रवेशद्वार पाहायला मिळते. त्याच्या आतील बाजूस अनेक खोल्या आहेत. हा बालेकिल्ला असावा.

• त्रिकोणाकृती बुरुज :

किल्याच्या सभोवती आपल्याला चार ठिकाणी विस्तृत त्रिकोणाकृती मजबूत पाया बांधणी असलेले बुरुज पहायला मिळतात. हे बांधकाम पोर्तुगीज कालीन आहे.

• आतील खोल्या : 

आत गेल्यावर डाव्या बाजूस एक समांतर खोली आहे. त्यातील गवाक्षे अजूनही सुस्थितीत आहेत. खालील बाजूस मोठ्या प्रमाणात वाळू माती आहे. बाजूच्या भिंती अजूनही दिमाखात उभा दिसतात.

केळवे किल्ल्याची माहिती मराठी भाषेत   Kelve killyachi mahiti


• खोली अवशेष :

ही एक निवासी वास्तू होती. या ठिकाणी अनेक खोल्या बांधकाम पाहायला मिळते. त्यामुळे येथे निवास तसेच धान्य, दारूगोळा, जेवण विभाग, निवास खोली असल्याचे जाणवते. एका पाठोपाठ एक अशा या खोल्या आहेत.

• दरवाजे व गवाक्ष :

जागोजागी कमानाकृती दरवाजे तसेच सुंदर खिडकी गवाक्षे पाहिल्यावर पूर्वीचे वैभव लक्षात येते. इमारतीचा खालील भाग मुजलेला आहे. पहिला मजला मोकळा आहे. 

केळवे किल्ल्याची माहिती मराठी भाषेत   Kelve killyachi mahiti


*केळवा किल्ल्याची ऐतिहासिक माहिती :

* पोर्तुगीजांनी पंधराव्या ते सोळाव्या शतकात समुद्री खाडीवर आपले नियंत्रण ठेवण्यासाठी हा किल्ला बांधला असावा.

* इसवी सनाच्या १७ व्या शतकात येथे साठ माणसांची चौकी तसेच १५ तोफा होत्या.

• १० जानेवारी १७३९ रोजी चिमाजी अप्पा यांनी वेढा घालून हा किल्ला स्वराज्यात घेतला.

• पुढे हा किल्ला इसवी सन १८१८ सालात हा किल्ला ब्रिटिश सत्तेच्या अंमलाखाली गेला.

• पुढे १९४७ सालात भारत स्वतंत्र झाल्यावर स्वतंत्र भारतात हा किल्ला आला.

• इसवी सन २००८-०९ साली वसई किल्ल्यांच्या मोहिमेत हा किल्ला अनेक लोकांच्या निदर्शनात आला.

• दुर्लक्ष झाल्याने तसेच भरती ओहोटी या समुद्री क्रियेमुळे किल्याच्या तळाला वाळू माती साचून गाढला गेला आहे. तसेच समुद्री सुरूची खारफुटीचे वन वाढली आहेत.

• राहण्याची सोय : 

जवळील केळवे गावी राहण्याची सोय होऊ शकते.

• जेवणाची सोय :

 जवळील केळवे गावी जेवणाची सोय होऊ शकते.

• पहायला लागणारा वेळ : 

पंधरा ते तीस मिनिटात किल्ला पाहू शकतो.

• पिण्याच्या पाण्याची सोय : 

येथे नाही. जवळील केळवे गावी पिण्याचे पाणी उपलब्ध होऊ शकते.

केळवे किल्ल्याची माहिती मराठी भाषेत   Kelve killyachi mahiti


• अशी आहे केळवे किल्ल्याची माहिती 

• Kelve killyachi mahiti marathi madhe.







शनिवार, १८ जुलै, २०२६

केलवे माहिम किला (पालघर माहिम का किला) | इतिहास, घूमने की जानकारी और प्रमुख दर्शनीय स्थल ,Kelve Mahim Fort Information in Hindi | Kelwe Mahim Fort Palghar

 


केलवे माहिम किला (पालघर माहिम का किला) | इतिहास, घूमने की जानकारी और प्रमुख दर्शनीय स्थल

केलवे माहिम किला (पालघर माहिम का किला) | इतिहास, घूमने की जानकारी और प्रमुख दर्शनीय स्थल ,Kelve Mahim Fort Information in Hindi | Kelwe Mahim Fort Palghar


केलवे माहिम किला महाराष्ट्र के पालघर जिले का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक समुद्री किला है। यह किला अपने समृद्ध इतिहास, मजबूत वास्तुकला और मराठा, पुर्तगाली तथा बिंब राजवंश से जुड़े गौरवशाली अतीत के लिए प्रसिद्ध है। आज यह भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित ऐतिहासिक धरोहर है। यदि आप पालघर घूमने की योजना बना रहे हैं तो केलवे माहिम किला अवश्य देखें।

स्थान

केलवे माहिम किला महाराष्ट्र राज्य के पालघर जिले में केलवे गांव के समीप माहिम गांव में, केलवे केंद्र विद्यालय के पास स्थित है। किले की बाहरी प्राचीर (तटबंदी) काफी हद तक नष्ट हो चुकी है, लेकिन इसका बालेकिला (मुख्य दुर्ग) आज भी सुरक्षित अवस्था में मौजूद है।

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केलवे माहिम किले तक कैसे पहुँचें?

मुंबई से वसई रोड होते हुए ढेकळे गांव, तांदुळवाड़ी मार्ग के माध्यम से केलवे गांव और फिर माहिम पहुंचकर इस किले तक पहुँचा जा सकता है।

- मुंबई तथा वसई रोड रेलवे स्टेशन भारत के प्रमुख शहरों से रेल एवं सड़क मार्ग द्वारा जुड़े हुए हैं।

- मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे निकट का प्रमुख एयरपोर्ट है।

- प्रसिद्ध केलवे बीच इस किले के निकट स्थित होने के कारण यहाँ पर्यटन का विशेष आकर्षण है।

केलवे माहिम किले में देखने योग्य स्थान

तटबंदी

किले के चारों ओर बनी विशाल तटबंदी अब अधिकांश स्थानों पर टूट चुकी है। वर्तमान में केवल इसके अवशेष ही देखने को मिलते हैं।

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बालेकिला प्रवेश द्वार

मुख्य बालेकिला आज भी अच्छी स्थिति में है। इसमें प्रवेश के लिए एक छोटा द्वार है, जहाँ आज भी पुराना लोहे का दरवाजा देखा जा सकता है।

 विशाल प्रांगण एवं कुआँ

अंदर प्रवेश करने पर चारों ओर ऊँची दीवारें तथा बीच में खुला प्रांगण दिखाई देता है। सामने सीढ़ियाँ हैं तथा पास में एक प्राचीन कुआँ स्थित है, जिसका पानी वर्तमान में उपयोग योग्य नहीं है।

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अंग्रेजी अक्षर "Y" आकार की सीढ़ियाँ

किले के भीतर अंग्रेजी अक्षर Y के आकार की अनोखी सीढ़ियाँ बनी हुई हैं, जिनसे मध्य भाग तथा ऊपरी मंजिल तक पहुँचा जा सकता है।

 कोठार

सीढ़ियों के समीप दीवारों में बनी बड़ी-बड़ी कोठारें दिखाई देती हैं। इनका उपयोग अनाज, बारूद तथा सैनिकों के रहने के लिए किया जाता था।

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सैनिक बराक

दीवारों के किनारे बरामदे जैसी संरचनाएँ दिखाई देती हैं, जो सैनिकों के रहने के लिए बनाई गई थीं।

. दो मंजिला सभा कक्ष

ऊपर जाने पर एक विशाल दो मंजिला कक्ष दिखाई देता है। लकड़ी की मूल संरचना नष्ट हो चुकी है, लेकिन सुंदर खिड़कियाँ (गवाक्ष) आज भी इसकी भव्यता का परिचय देती हैं। माना जाता है कि यह सभा भवन या सामूहिक बैठक के लिए उपयोग किया जाता था।

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 प्राचीर, जंग्या और तोपों के स्थान

ऊपरी भाग में चारों ओर घूमने के लिए मार्ग बनाया गया है। यहाँ दुश्मनों पर नजर रखने तथा बंदूक और तोप चलाने के लिए विशेष जंग्या और तोप रखने के स्थान बनाए गए हैं।

. जलाशय

किले के दक्षिण-पश्चिम दिशा में एक छोटा तालाब स्थित है।

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. विशाल वटवृक्ष

बालेकिले के बाहर एक प्राचीन और विशाल वटवृक्ष पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करता है।

. भवानी मंदिर

किले के उत्तर दिशा में स्थित नया भवानी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख धार्मिक स्थल है।

केलवे माहिम किला (पालघर माहिम का किला) | इतिहास, घूमने की जानकारी और प्रमुख दर्शनीय स्थल ,Kelve Mahim Fort Information in Hindi | Kelwe Mahim Fort Palghar


केलवे माहिम किले का इतिहास

- लगभग 1240–1241 ईस्वी में बिंब राजवंश के राजा प्रतापसिंह बिंब ने उत्तर कोंकण में दमण से वाळकेश्वर तक अपना राज्य स्थापित किया और माहिम किले का निर्माण कराया।

- बाद में सरदार भिमराव ने इस क्षेत्र पर अधिकार स्थापित किया।

- 14वीं शताब्दी में गुजरात सल्तनत ने इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया।

- 1534 ईस्वी में पुर्तगालियों ने इस किले पर अधिकार कर लिया।

- 1684 ईस्वी में छत्रपति संभाजी महाराज ने इस किले पर आक्रमण किया, लेकिन औरंगज़ेब के स्वराज्य पर आक्रमण के कारण यह अभियान बीच में रोकना पड़ा।

- 30 दिसंबर 1738 को पेशवा काल में चिमाजी अप्पा ने इस किले की घेराबंदी की। उस समय किले का नियंत्रण पुर्तगाली किलेदार आन्तेलियो द मेलो के हाथों में था। - मराठा सेना में लगभग 8,000 पैदल सैनिक, 14,000 घुड़सवार, 15 हाथी, अनेक ऊँट तथा 12 तोपें शामिल थीं। भीषण तोपों की गोलाबारी और घेराबंदी के बाद पुर्तगाली किलेदार ने आत्मसमर्पण कर दिया।

- 9 जनवरी 1739 को केलवे माहिम किला मराठा साम्राज्य के अधिकार में आ गया।

- 1818 तक यह किला मराठा शासन के अधीन रहा, इसके बाद अंग्रेजों के कब्जे में चला गया।

- 1862 तक यह ठाणे जिले के कलेक्टर का निवास स्थान रहा।

- 15 अगस्त 1947 को भारत की स्वतंत्रता के बाद यह किला भारत सरकार के अधिकार में आया।

- वर्तमान में यह भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित ऐतिहासिक स्मारक है।

केलवे माहिम किला (पालघर माहिम का किला) | इतिहास, घूमने की जानकारी और प्रमुख दर्शनीय स्थल ,Kelve Mahim Fort Information in Hindi | Kelwe Mahim Fort Palghar


निष्कर्ष

केलवे माहिम किला पालघर जिले की ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। इसका गौरवशाली इतिहास, प्राचीन स्थापत्य कला, विशाल बालेकिला और मराठा-पुर्तगाली संघर्ष की यादें इसे इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण बनाती हैं। यदि आप पालघर या केलवे बीच घूमने जाएँ, तो इस ऐतिहासिक किले का अवश्य भ्रमण करें।

Kelve Mahim Fort Information in Hindi | Kelwe Mahim Fort Palghar


Kelve Mahim Fort Information in English | Palghar Mahim Fort


Kelve Mahim Fort Information in English | Palghar Mahim Fort

Kelve Mahim Fort Information in English | Palghar Mahim Fort


Kelve Mahim Fort, also known as Palghar Mahim Fort, is an important historical sea fort located in the Palghar district of Maharashtra, India. The fort is known for its rich history, impressive military architecture, and its association with the Bimb dynasty, the Portuguese, the Marathas, and the British. Today, it is a protected historical monument under the Archaeological Survey of India (ASI) and attracts history enthusiasts, heritage lovers, and tourists.

Location

Kelve Mahim Fort is situated in Mahim village near Kelve village in Palghar district, Maharashtra. The fort is located close to Kelve Central School. Although much of the outer fortification has collapsed over time, the main citadel (Balekilla) still stands in good condition.

Kelve Mahim Fort Information in English | Palghar Mahim Fort


How to Reach Kelve Mahim Fort

Kelve Mahim Fort can be reached from Mumbai via Vasai Road, Dhekle village, Tandulwadi, and Kelve village before arriving at Mahim.

- Mumbai and Vasai Road Railway Stations are well connected to major cities across India.

- Chhatrapati Shivaji Maharaj International Airport, Mumbai, is the nearest international airport.

- The fort is located close to the famous Kelve Beach, making it an ideal destination for history and beach tourism.

Kelve Mahim Fort Information in English | Palghar Mahim Fort


Places to Visit Inside Kelve Mahim Fort

 Fortification Walls

Most of the fort's outer defensive walls have collapsed, but their ruins still reflect the fort's original grandeur.

 Main Citadel Entrance

The entrance to the Balekilla remains well preserved. Visitors can still see the old iron gate that once protected the inner fort.

 Large Courtyard and Well

Inside the fort is a spacious open courtyard surrounded by high walls. A historic well is located nearby, although its water is no longer suitable for drinking.

Kelve Mahim Fort Information in English | Palghar Mahim Fort


 Y-Shaped Staircase

One of the unique architectural features of the fort is its English letter "Y" shaped staircase, providing access to the upper levels and central section of the fort.

. Storage Rooms

Large chambers built into the walls were used for storing food grains, ammunition, and military supplies. Some rooms also served as living quarters for soldiers.

Kelve Mahim Fort Information in English | Palghar Mahim Fort


Soldiers' Barracks

The remains of barrack-style rooms can still be seen, where soldiers once lived while guarding the fort.

Two-Storey Hall

The upper level contains a magnificent two-storey hall. Although the wooden structure has disappeared, the beautiful windows and arches still showcase the fort's architectural elegance. It was likely used as a meeting hall or administrative chamber.

Kelve Mahim Fort Information in English | Palghar Mahim Fort


Ramparts, Gun Loopholes and Cannon Positions

The top of the fort features a walkway along the ramparts. Gun loopholes and cannon platforms were strategically built for surveillance and defense against enemy attacks.

Water Tank

A small water tank is situated on the south-western side of the fort.

Kelve Mahim Fort Information in English | Palghar Mahim Fort


Kelve Mahim Fort Information in English | Palghar Mahim Fort


Ancient Banyan Tree

A massive banyan tree located outside the Balekilla adds to the natural beauty and historical atmosphere of the site.

 Bhavani Temple

A newly constructed Bhavani Temple is located on the northern side of the fort and is visited by devotees throughout the year.

History of Kelve Mahim Fort

Kelve Mahim Fort Information in English | Palghar Mahim Fort


- Around 1240–1241 AD, King Pratap Singh Bimb, a ruler of the Bimb dynasty, established the Mahikavati Kingdom in North Konkan from Daman to Walkeshwar and constructed Kelve Mahim Fort.

- The region was later brought under the control of Sardar Bhimrao.

- During the 14th century, the Gujarat Sultanate conquered the area.

- In 1534 AD, the Portuguese captured the fort.

- In 1684 AD, Chhatrapati Sambhaji Maharaj attacked the fort but could not capture it because he had to respond to Aurangzeb's invasion of the Maratha Kingdom.

- On 30 December 1738, Chimaji Appa laid siege to the fort during the Maratha campaign against the Portuguese. At that time, the fort was commanded by the Portuguese officer António de Melo. - The Maratha army consisted of approximately 8,000 infantry, 14,000 cavalry, 15 elephants, several camels, and 12 cannons. Following intense artillery bombardment and a prolonged siege, the Portuguese commander surrendered the fort.

- On 9 January 1739, Kelve Mahim Fort officially came under Maratha rule.

- The fort remained under the Marathas until 1818, after which it was occupied by the British.

- Until 1862, it served as the residence of the Collector of Thane District.

- After India's Independence on 15 August 1947, the fort became the property of the Government of India.

- Today, it is a protected monument maintained by the Archaeological Survey of India (ASI).

Kelve Mahim Fort Information in English | Palghar Mahim Fort


Conclusion

Kelve Mahim Fort is an outstanding symbol of Maharashtra's rich historical and cultural heritage. Its fascinating history, impressive military architecture, and connection with the Bimb dynasty, the Portuguese, the Marathas, and the British make it an important destination for travelers, historians, photographers, and heritage lovers. If you are planning to visit Palghar or Kelve Beach, Kelve Mahim Fort deserves a place on your travel itinerary.

This is Kelve Mahim Fort Information in English |



केळवे माहीम किल्ला ( पालघर माहिमचा किल्ला) Kelve mahim fort information marathi

 

केळवे माहीम किल्ला ( पालघर माहिमचा किल्ला)
Kelve mahim fort information marathi

केळवे माहीम किल्ला ( पालघर माहिमचा किल्ला)  Kelve mahim fort information marathi


• स्थान : 

महाराष्ट्र राज्यातील पालघर जवळ केळवे गावाजवळ माहीम गावी हा किल्ला केळवे केंद्र शाळेजवळ हा किल्ला स्थित आहे. बाजूची तटबंदी ढासळली असली. तरी बालेकिल्ला अजूनही अस्तित्वात आहे.

• किल्ल्याकडे जाण्यासाठी प्रवासी मार्ग :

• मुंबई या आंतरराष्ट्रीय ठिकाणापासून वसई रोडने ढेकळे गावातून पुढे तांदुळवाडी मार्गे केळवे गावी व पुढे माहीम येथे हा किल्ला स्थित आहे.

• मुंबई तसेच वसई ही स्थानके रस्ते व रेल्वेद्वारे उर्वरित भारताशी जोडली गेली आहेत.

• मुंबई हे आंतरराष्ट्रीय बंदर आहे. तसेच केळवे बीच हा भाग समुद्राशी जवळ आहे.

केळवे माहीम किल्ला ( पालघर माहिमचा किल्ला)  Kelve mahim fort information marathi


• किल्यावर पाहण्यायोग्य ठिकाणे :

• तटबंदी :

किल्याच्या सभोवती असलेली तटबंदी ढासळली आहे. तेथे फक्त पायाभूत अवशेष पाहायला मिळतात.

• बालेकिल्ला गेट :

किल्याचा बालेकिल्ला हा भाग अजूनही सुस्थितीत असून आत प्रवेश घेण्यासाठी एक छोटा दरवाजा आहे. त्यास हल्ली जुना लोखंडी दरवाजा पहायला मिळतो.

• विस्तृत आवार व विहिर :

आत प्रवेश केल्यावर सभोवती उंच भिंती व मध्यभागी मोकळे दालन आहे. समोर जीना आहे. त्या शेजारी पुढे मोकळ्या जागेत एक विहीर पाहायला मिळते. विहिरीतील पाणी अशुद्ध वाटते .

• वाय आकाराचा जिना : समोर इंग्रजी वाय आकाराचा जीना पहायला मिळतो. यावरुन किल्ल्याच्या मध्य दालनात व वरील भागात जाता येते. 

• कोठारे : जिन्याच्या बाजूला असलेल्या भिंतीत आपल्याला विस्तृत खोल्या पाहायला मिळतात. त्या धान्य, दारूगोळा ठेवण्यासाठी तसेच सैनिकांना राहण्यासाठी खोदलेल्या आढळतात.

• बराखी : 

शेजारी भिंतीत पडवीसारख्या बांधलेल्या खोल्यांच्या भिंती दिसून येतात. या बराखी आहेत. सैनिकांना राहण्यासाठी बांधलेल्या खोल्यांचे अवशेष दिसतात.

केळवे माहीम किल्ला ( पालघर माहिमचा किल्ला)  Kelve mahim fort information marathi


• दुमजली दालन खोली :

अर्धा जिना चढून वर गेल्यावर आपल्याला पहिल्या टप्यावर असलेल्या दरवाजातून आत गेल्यावर दुमजली दालन लागते. आतील लाकूड सामान नष्ट झाले आहे. वरील बाजूस जागोजागी गवाक्ष पहायला मिळतात. दुमजली गवाक्ष पाहिल्यावर प्राचीन वैभवाची कल्पना येते. हा विस्तृत आवार हा सामूहिक बैठक करण्यासाठी केला असावा. अथवा हे एक सभागृह असावे.

• बालेकिल्ला तटबंदी, जंग्या व फांज्या :

जिना चढून वर गेल्यावर सभोवती फिरण्यासाठी भिंतीच्या आतील बाजूस पादचारी पथ सभोवती असून त्यामध्ये जागोजागी टेहळणीसाठी जागा ठेवलेल्या आहेत. तसेच शत्रूचा वेध घेण्यासाठी जागोजागी बंदूक व बाणांचा मारा करण्यासाठी जंग्या व तोफ मारा करण्यासाठी फांज्या ठेवलेल्या आहेत.

केळवे माहीम किल्ला ( पालघर माहिमचा किल्ला)  Kelve mahim fort information marathi



• पाणी तळे : 

किल्याच्या शेजारी नैऋत्येस एक छोटे तळे आहे. 

• वटवृक्ष : 

बालेकिल्ल्याच्या बाहेर आपल्याला एक विशाल वटवृक्ष पहायला मिळतो.

• भवानी मंदिर :

किल्याच्या बाहेरील उत्तर बाजूस आपल्याला नवीन बांधलेले भवानी मंदिर पाहायला मिळते.

• केळवे माहीम किल्ल्याविषयी ऐतिहासिक माहिती :

केळवे माहीम किल्ला ( पालघर माहिमचा किल्ला)  Kelve mahim fort information marathi


• भीमदेव राजाचा वंशज प्रतापसिंह बिंब या राजाने महिकावती राज्य उत्तर कोकणात दमण ते वाळकेश्वर भाग जिंकून महिकावती राज्य इसवी सन १२४० ते ४१ दरम्यान स्थापन केले. व माहीम किल्ला बांधला.

• पुढे सरदार भिमराव यांनी हे राज्य आपल्या अधीन केले.

• इसवी सनाच्या १४ व्या शतकात गुजरातच्या सुलतानाने हा प्रदेश जिंकून घेतला. 

• इसवी सन १५३४ साली हा किल्ला पोर्तुगीजांनी जिंकून घेतला.

• इसवी सन १६८४ साली छत्रपती संभाजी महाराज यांनी या किल्ल्यावर हल्ला चढवला. पण ताब्यात घेता आला नाही. कारण स्वराज्यावर औरंगजेब चालून आल्यावर त्यांना ही मोहीम स्थगित करावी लागली.

• ३० डिसेंबर १७३९ रोजी चिमाजी अप्पा यांनी पेशवेकाळात या किल्ल्यावर हल्ला चढवून बाजूची झाडी तोडून वेढा घातला. तेव्हा पोर्तुगीज फिरंगी आन्तेलिओ दमेलो याच्या ताब्यात किल्ला होता. किल्ला संरक्षणासाठी ऐतदेशीय चार बराखी व पोर्तुगीज सेना भरपूर होती. वेढा पडल्यावरच किल्लेदाराचे पत्र उपलब्ध आहे. त्यात मराठ्यांनी केवढी शिबंदी आणली होती याचा उल्लेख आहे. यामध्ये चिमाजी आप्पा,पिलाजी जाधव , शंकराजी पंत स्वतः ८००० ची फौज सैन्य, १४००० घोडदळ, १५ हत्ती, अनेक उंट व १२ तोफा एवढी सामग्री व सैन्य होते. मराठ्यांनी तोफांचा मोठा धडाका लावलेला आहे. सुरुंग ठासून तटबंदी कोसळून मराठे आत घुसणार व मोठी हानी होऊ नये म्हणून किल्लेदाराने. ९ तारखेला कौल घेतला मोठी कुमक असताना न लढता किल्ला दिला म्हणून किल्लेदाराच बेअब्रू केली. असा उल्लेख शेवटी आला आहे.

• ९ जानेवारी १७३९ साली किल्ला मराठा सत्तेच्या ताब्यात आला.

• इसवी सन १८१८ सालापर्यंत मराठी सत्तेच्या ताब्यात हा किल्ला होता. पुढे हा किल्ला इंग्रजी सत्तेच्या अंमलाखाली आला.

• इसवी सन १८६२ सालापर्यंत ठाणे जिल्ह्याचे जिल्हाधिकारी यांचे निवासस्थान येथे होते. पुढे या किल्ल्याकडे दुर्लक्ष झाले.

• १५ ऑगस्ट १९४७ रोजी हा किल्ला भारत स्वतंत्र झाल्यावर स्वतंत्र भारत सरकारच्या ताब्यात आला. आज तो भारतीय पुरातत्व खात्याच्या ताब्यात आहे. हे एक ऐतिहासिक स्थळ आहे. 

केळवे माहीम किल्ला ( पालघर माहिमचा किल्ला)  Kelve mahim fort information marathi


• अशी आहे केळवे माहीम किल्लाची माहिती.( पालघर माहिमचा किल्ला)

• Kelve mahim fort information marathi





शनिवार, ४ जुलै, २०२६

माहिम किला 1/ Mahim Fort1


माहिम किला (Mahim Fort) – इतिहास, घूमने की पूरी जानकारी, वास्तुकला और कैसे पहुँचें


माहिम किला (Mahim Fort) 

महिम किला 1/ Mahim Fort1


मुंबई के सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक समुद्री किलों में से एक है। यह किला महाराष्ट्र के मुंबई शहर में महिम खाड़ी के किनारे स्थित है। अपनी मजबूत किलेबंदी, ऐतिहासिक महत्व और सुंदर समुद्री दृश्य के कारण यह इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यदि आप मुंबई के ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा करना चाहते हैं, तो महिम किला अवश्य देखें।

माहिम किला कहाँ स्थित है?

महिम किला महाराष्ट्र के मुंबई शहर में महिम खाड़ी के किनारे स्थित है। प्राचीन समय में इस स्थान को महिकावती के नाम से जाना जाता था। बाद में अंग्रेज़ों के शासनकाल में इसका नाम महिम पड़ गया। महिम नदी आगे जाकर मिठी नदी में मिलती है, जिससे यह स्थान प्राकृतिक और सामरिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण बन जाता है।

माहिम किले तक कैसे पहुँचें?

महिम किला पहुँचने के लिए पश्चिम रेलवे के महिम रेलवे स्टेशन पर उतरें। वहाँ से मोरी रोड के रास्ते समुद्र तट की ओर लगभग 10 मिनट पैदल चलने पर यह ऐतिहासिक किला दिखाई देता है।

महिम किला 1/ Mahim Fort1


महिम किले में क्या-क्या देखें?

1. मजबूत किलेबंदी

महिम किले की मजबूत पत्थर की दीवारें इसकी सबसे बड़ी विशेषता हैं। हाल के वर्षों में इनकी मरम्मत और संरक्षण किया गया है। पर्यटक आज भी किले की प्राचीर पर बने मार्ग से घूम सकते हैं।

2. जंग्या और फांजियाँ

किले की दीवारों में बने जंग्या और फांजियाँ तत्कालीन युद्धकला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

- जंग्या का उपयोग सैनिक बंदूक और तीर चलाने के लिए करते थे।

- फांजियाँ बड़े छिद्र होते थे, जिनसे दुश्मनों पर तोप दागी जाती थी।

महिम किला 1/ Mahim Fort1


3. त्रिकोणीय बुर्ज

ब्रिटिश काल में बनाए गए त्रिकोणीय बुर्ज किले की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाते थे। इनकी विशेष बनावट के कारण दुश्मन की तोपों का प्रभाव कम हो जाता था।

महिम किला 1/ Mahim Fort1


4. ऐतिहासिक प्रवेश द्वार

किले का मुख्य प्रवेश द्वार आज भी अच्छी स्थिति में सुरक्षित है। दोनों ओर बने सुंदर नक्काशीदार स्तंभ इसकी भव्यता को दर्शाते हैं। प्रवेश द्वार के भीतर देवड़ी और एक दूसरा दरवाज़ा भी है।

5. मीठे पानी का कुआँ

किले के अंदर स्थित कुएँ में आज भी मीठा पानी उपलब्ध है। यह उस समय सैनिकों के लिए जल का मुख्य स्रोत था।

महिम किला 1/ Mahim Fort1


6. समुद्री द्वार

समुद्र की ओर बनाया गया यह द्वार नावों के आवागमन और आपातकालीन निकास के लिए उपयोग किया जाता था।

7. अलंकृत स्तंभ

किले के भीतर सुंदर नक्काशी वाले पत्थर के स्तंभ आज भी देखने को मिलते हैं, जो उस समय की उत्कृष्ट शिल्पकला का परिचय देते हैं।

8. उद्यान और मनमोहक दृश्य

किले के परिसर में एक सुंदर उद्यान विकसित किया गया है। यहाँ से महिम खाड़ी और बांद्रा-वर्ली सी लिंक का शानदार दृश्य दिखाई देता है।

महिम किला 1/ Mahim Fort1


महिम किले का इतिहास

महिम किले का उल्लेख प्राचीन मध्यकालीन ग्रंथ महिकावती में मिलता है।

11वीं शताब्दी में राजा प्रतापराजे बिंब ने अपनी राजधानी महिकावती की सुरक्षा के लिए इस किले का निर्माण कराया।

बाद में गुजरात के सुल्तानों ने इस किले पर अधिकार कर लिया।

सन 1516 में पुर्तगाली अधिकारी टॉम होमाबे मोनो ने इस किले पर विजय प्राप्त की। इसके बाद गुजरात के सुल्तानों और पुर्तगालियों के बीच कई संघर्ष हुए।

सन 1534 में महिम किला पूरी तरह पुर्तगालियों के अधीन आ गया।

सन 1661 में पुर्तगाल की राजकुमारी के विवाह के समय मुंबई इंग्लैंड को दहेज में सौंपा गया और महिम किला भी अंग्रेज़ों के अधिकार में चला गया।

ब्रिटिश प्रशासक जेरॉल्ड ऑगियर ने किले की किलेबंदी, प्रवेश द्वार, बुर्ज और अन्य संरचनाओं को मजबूत कराया।

सन 1672 में पुर्तगालियों ने महिम किले पर हमला किया, लेकिन किले में मौजूद केवल 100 सैनिक और 30 तोपों ने उन्हें सफल नहीं होने दिया।

14 फरवरी 1689 को जंजीरा के सिद्दी याकूब खान ने 2500 सैनिकों के साथ हमला कर किले पर कब्ज़ा कर लिया और भारी लूटपाट की। बाद में अंग्रेज़ों ने पुनः इस किले पर अधिकार कर लिया।

भारत की स्वतंत्रता के बाद 15 अगस्त 1947 से यह किला भारत सरकार के अधीन आ गया।

आज भारतीय पुरातत्व विभाग इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और पर्यटन विकास के लिए कार्य कर रहा है।

महिम किला घूमने का सबसे अच्छा समय

महिम किला घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और समुद्र का दृश्य भी बेहद आकर्षक दिखाई देता है।

निष्कर्ष

महिम किला केवल एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं, बल्कि मुंबई के गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रमाण है। यदि आप इतिहास, वास्तुकला और समुद्री किलों में रुचि रखते हैं, तो महिम किला आपकी यात्रा सूची में अवश्य होना चाहिए।

महिम किला 1/ Mahim Fort1


क्या आपने महिम किला देखा है? अपना अनुभव नीचे कमेंट में ज़रूर साझा करें।: 

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