crossorigin='anonymous' src='https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1553308877182847'/> महाराष्ट्र किल्ले व स्थळे यांची माहिती Forts and places in maharashtra: जुलै 2026

शनिवार, ४ जुलै, २०२६

माहिम किला 1/ Mahim Fort1


माहिम किला (Mahim Fort) – इतिहास, घूमने की पूरी जानकारी, वास्तुकला और कैसे पहुँचें


माहिम किला (Mahim Fort) 

महिम किला 1/ Mahim Fort1


मुंबई के सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक समुद्री किलों में से एक है। यह किला महाराष्ट्र के मुंबई शहर में महिम खाड़ी के किनारे स्थित है। अपनी मजबूत किलेबंदी, ऐतिहासिक महत्व और सुंदर समुद्री दृश्य के कारण यह इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यदि आप मुंबई के ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा करना चाहते हैं, तो महिम किला अवश्य देखें।

माहिम किला कहाँ स्थित है?

महिम किला महाराष्ट्र के मुंबई शहर में महिम खाड़ी के किनारे स्थित है। प्राचीन समय में इस स्थान को महिकावती के नाम से जाना जाता था। बाद में अंग्रेज़ों के शासनकाल में इसका नाम महिम पड़ गया। महिम नदी आगे जाकर मिठी नदी में मिलती है, जिससे यह स्थान प्राकृतिक और सामरिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण बन जाता है।

माहिम किले तक कैसे पहुँचें?

महिम किला पहुँचने के लिए पश्चिम रेलवे के महिम रेलवे स्टेशन पर उतरें। वहाँ से मोरी रोड के रास्ते समुद्र तट की ओर लगभग 10 मिनट पैदल चलने पर यह ऐतिहासिक किला दिखाई देता है।

महिम किला 1/ Mahim Fort1


महिम किले में क्या-क्या देखें?

1. मजबूत किलेबंदी

महिम किले की मजबूत पत्थर की दीवारें इसकी सबसे बड़ी विशेषता हैं। हाल के वर्षों में इनकी मरम्मत और संरक्षण किया गया है। पर्यटक आज भी किले की प्राचीर पर बने मार्ग से घूम सकते हैं।

2. जंग्या और फांजियाँ

किले की दीवारों में बने जंग्या और फांजियाँ तत्कालीन युद्धकला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

- जंग्या का उपयोग सैनिक बंदूक और तीर चलाने के लिए करते थे।

- फांजियाँ बड़े छिद्र होते थे, जिनसे दुश्मनों पर तोप दागी जाती थी।

महिम किला 1/ Mahim Fort1


3. त्रिकोणीय बुर्ज

ब्रिटिश काल में बनाए गए त्रिकोणीय बुर्ज किले की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाते थे। इनकी विशेष बनावट के कारण दुश्मन की तोपों का प्रभाव कम हो जाता था।

महिम किला 1/ Mahim Fort1


4. ऐतिहासिक प्रवेश द्वार

किले का मुख्य प्रवेश द्वार आज भी अच्छी स्थिति में सुरक्षित है। दोनों ओर बने सुंदर नक्काशीदार स्तंभ इसकी भव्यता को दर्शाते हैं। प्रवेश द्वार के भीतर देवड़ी और एक दूसरा दरवाज़ा भी है।

5. मीठे पानी का कुआँ

किले के अंदर स्थित कुएँ में आज भी मीठा पानी उपलब्ध है। यह उस समय सैनिकों के लिए जल का मुख्य स्रोत था।

महिम किला 1/ Mahim Fort1


6. समुद्री द्वार

समुद्र की ओर बनाया गया यह द्वार नावों के आवागमन और आपातकालीन निकास के लिए उपयोग किया जाता था।

7. अलंकृत स्तंभ

किले के भीतर सुंदर नक्काशी वाले पत्थर के स्तंभ आज भी देखने को मिलते हैं, जो उस समय की उत्कृष्ट शिल्पकला का परिचय देते हैं।

8. उद्यान और मनमोहक दृश्य

किले के परिसर में एक सुंदर उद्यान विकसित किया गया है। यहाँ से महिम खाड़ी और बांद्रा-वर्ली सी लिंक का शानदार दृश्य दिखाई देता है।

महिम किला 1/ Mahim Fort1


महिम किले का इतिहास

महिम किले का उल्लेख प्राचीन मध्यकालीन ग्रंथ महिकावती में मिलता है।

11वीं शताब्दी में राजा प्रतापराजे बिंब ने अपनी राजधानी महिकावती की सुरक्षा के लिए इस किले का निर्माण कराया।

बाद में गुजरात के सुल्तानों ने इस किले पर अधिकार कर लिया।

सन 1516 में पुर्तगाली अधिकारी टॉम होमाबे मोनो ने इस किले पर विजय प्राप्त की। इसके बाद गुजरात के सुल्तानों और पुर्तगालियों के बीच कई संघर्ष हुए।

सन 1534 में महिम किला पूरी तरह पुर्तगालियों के अधीन आ गया।

सन 1661 में पुर्तगाल की राजकुमारी के विवाह के समय मुंबई इंग्लैंड को दहेज में सौंपा गया और महिम किला भी अंग्रेज़ों के अधिकार में चला गया।

ब्रिटिश प्रशासक जेरॉल्ड ऑगियर ने किले की किलेबंदी, प्रवेश द्वार, बुर्ज और अन्य संरचनाओं को मजबूत कराया।

सन 1672 में पुर्तगालियों ने महिम किले पर हमला किया, लेकिन किले में मौजूद केवल 100 सैनिक और 30 तोपों ने उन्हें सफल नहीं होने दिया।

14 फरवरी 1689 को जंजीरा के सिद्दी याकूब खान ने 2500 सैनिकों के साथ हमला कर किले पर कब्ज़ा कर लिया और भारी लूटपाट की। बाद में अंग्रेज़ों ने पुनः इस किले पर अधिकार कर लिया।

भारत की स्वतंत्रता के बाद 15 अगस्त 1947 से यह किला भारत सरकार के अधीन आ गया।

आज भारतीय पुरातत्व विभाग इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और पर्यटन विकास के लिए कार्य कर रहा है।

महिम किला घूमने का सबसे अच्छा समय

महिम किला घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और समुद्र का दृश्य भी बेहद आकर्षक दिखाई देता है।

निष्कर्ष

महिम किला केवल एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं, बल्कि मुंबई के गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रमाण है। यदि आप इतिहास, वास्तुकला और समुद्री किलों में रुचि रखते हैं, तो महिम किला आपकी यात्रा सूची में अवश्य होना चाहिए।

महिम किला 1/ Mahim Fort1


क्या आपने महिम किला देखा है? अपना अनुभव नीचे कमेंट में ज़रूर साझा करें।: 

Mahim Fort, Mahim Fort Mumbai

Mahim Fort – Complete Information, History, Architecture & Travel Guide

 

Mahim Fort – Complete Information, History, Architecture & Travel Guide

Mahim Fort – Complete Information, History, Architecture & Travel Guide


Location

Mahim Fort is a historic sea fort located on the banks of Mahim Creek in Mumbai, Maharashtra, India. In ancient times, this region was known as Mahikavati, the capital of the Bimb dynasty. During the British period, the area came to be known as Mahim. The nearby Mahim River later joins the Mithi River before flowing into the Arabian Sea.

How to Reach Mahim Fort

Mahim Fort is easily accessible from Mahim Railway Station on the Western Railway line. From the station, visitors can walk for approximately 10 minutes via Mori Road towards the seashore to reach the fort.

Mahim Fort – Complete Information, History, Architecture & Travel Guide


Things to See at Mahim Fort

Strong Fortification

The fort is surrounded by strong defensive walls that have recently been restored and strengthened. A pathway has been built along the inner ramparts, allowing visitors to explore the fort safely.

Loopholes and Cannon Openings

The fort walls contain numerous defensive openings.

- Loopholes were used by soldiers to fire guns and arrows.

- Cannon openings were designed for firing cannons at enemy ships and armies.

Mahim Fort – Complete Information, History, Architecture & Travel Guide


Triangular Bastions

The British constructed triangular bastions to improve the fort's defense. Their unique design reduced the impact of enemy cannon fire and provided better protection.

Main Entrance

The British-era entrance gate remains well preserved. Beautiful carved stone pillars decorate both sides of the gateway. Inside are a guard chamber (Deodi) and another entrance gate. Today, an iron gate protects the entrance.

Mahim Fort – Complete Information, History, Architecture & Travel Guide


Freshwater Well

A well inside the fort still contains fresh drinking water, which served as an important water source for the soldiers.

Sea Gate

A sea gate was built on the creek side to allow access by boat and to provide an emergency escape route during attacks.

Ornamental Pillars

Several beautifully carved ornamental pillars can still be seen within the fort.

Garden and Scenic View

A landscaped garden has been developed inside the fort premises. Visitors can enjoy magnificent views of Mahim Creek and the famous Bandra–Worli Sea Link. A police headquarters is also located near the fort.

Mahim Fort – Complete Information, History, Architecture & Travel Guide


History of Mahim Fort

Mahim Fort is mentioned in the medieval chronicle Mahikavati.

In the 11th century, King Pratapraja Bimb built the fort to protect his capital, Mahikavati, from enemy invasions.

Later, the fort was captured by the Sultan of Gujarat during the Muslim invasions.

In 1516, Portuguese commander Tom Homem captured Mahim Fort. Several battles were fought between the Portuguese and Sultan Ali Shah of Gujarat for control of the fort.

By 1534, the Portuguese had established complete control over Mahim Fort.

In 1661, the marriage of the Portuguese princess Catherine of Braganza to King Charles II of England resulted in Bombay being transferred to England as part of her dowry. Mahim Fort also came under British rule.

British Governor Gerald Aungier strengthened the fort by rebuilding its walls, entrance gate, bastions, prayer hall, and internal structures. Most of these structures have now disappeared.

In 1672, the Portuguese attempted to recapture Bombay and Mahim Fort but failed despite attacking a fort defended by only 100 soldiers and 30 cannons.

On 14 February 1689, Siddi Yakut Khan of Janjira attacked Mahim with 2,500 soldiers, captured the fort, and looted the surrounding area.

The British later regained possession of the fort.

Following India's Independence on 15 August 1947, Mahim Fort became the property of the Government of India.

For many years, illegal encroachments surrounded the fort, causing severe neglect. Today, these encroachments have been removed, and the Archaeological Survey of India (ASI) is actively conserving the monument and promoting it as an important historical and tourist destination.

Mahim Fort – Complete Information, History, Architecture & Travel Guide


Conclusion

Mahim Fort is one of Mumbai's important historical sea forts, reflecting the architectural styles of the Bimb rulers, Portuguese, and British. Its strategic location, strong fortifications, and rich history make it a must-visit destination for history enthusiasts, architecture lovers, and tourists exploring Mumbai.

This is 

Mahim Fort – Complete Information, History, Architecture & Travel Guide



महिम किल्ला / mahim Fort 1

 महिम किल्ला / mahim Fort


महिम किल्ला / mahim Fort 1


• स्थान :

महाराष्ट्र राज्यातील मुंबई या शहरात असलेल्या माहीम खाडीजवळ माहीम किल्ला आहे. या ठिकाणास महिकावती या नावाने ओळखले जात असे. इंग्रज काळात माहीम या नावे ओळखले जाऊ लागले. येथे माहीम नदी पुढे जाऊन मिठी नदीस मिळते.

माहीम किल्ल्याकडे जाण्यासाठी प्रवासी मार्ग :

• पश्चिम रेल्वेच्या माहिम रेल्वे स्थानकावर उतरुन आपण मोरी रोड मार्गे समुद्र किनाऱ्याकडे चालत गेल्यावर दहा मिनिटात समुद्र किनाऱ्यावर पोहोचतो. तेथे आपल्याला महिमचा किल्ला पहायला मिळतो.

किल्यावर पाहण्यायोग्य ठिकाणे :



• भक्कम तटबंदी :

या किल्ल्यास भक्कम तटबंदी आहे. या तटबंदीची अलीकडे डागडुजी करुन बळकटी करण्यात आलेली आहे. तटबंदीच्या आतील बाजूस आपल्याला समांतर तटावर फिरण्यासाठी वाट आहे.

महिम किल्ला / mahim Fort 1


• जंग्या व फांज्या :

तटबंदी मध्ये आपल्याला जागोजागी जंग्या व फांज्या पाहायला मिळतात. जंग्यांचा बंदूक अथवा धनुष्यातून बाण मारण्यासाठी वापर केला जातो.

• फांज्या : हे तटातील मोठे होल असते. ज्यातून तोफेने मारा करता येतो.

• त्रिकोणी बुरुज :

ब्रिटिश सत्तेच्या ताब्यात हा किल्ला आल्यावर किल्याच्या मजबुतीसाठी त्रिकोणी बुरुज बांधले गेले. ज्यामुळे तोफेचा मारा झाला तरी त्रिकोणी रचना असल्याने कोणताही परिणाम होत नसे. व बुरुज बळकट असल्याने किल्ला सुरक्षित राहत असे.

महिम किल्ला / mahim Fort 1


• प्रवेशद्वार :

किल्ल्यास बांधलेले ब्रिटिश कालीन प्रवेशद्वारे आजही सुस्थितीत असल्याचे पाहायला मिळतात. दरवाजा शेजारी नक्षीदार स्तंभ आहेत. प्रवेशद्वार आतील बाजूस देवडी असून पुढे आतमध्ये दार आहे. सध्या बाहेरून लोखंडी दरवाजे आहेत.

• विहीर :

किल्याच्या आतील बाजूला विहीर असून विहिरीत गोडे पाणी आहे.

• सागरी दरवाजा :

खाडीच्या बाजूला समुद्र प्रवेशद्वार आहे. ज्याद्वारे समुद्र मार्गे ये जा करता येत असे. तसेच संकटकाळी बाहेर जाता येत असे.

• उठावदार खांब :

• आतील बाजूस उठावदार खांब आहेत.

• पोलिस मुख्यालय व गार्डन :

किल्याच्या आवारात सुंदर बगीचा तयार केला असून. समोर विस्तृत खाडी व वांद्रे सेतू पहायला मिळतो. तसेच जवळ पोलिस मुख्यालय देखील आहे

महिम किल्ला / mahim Fort 1


माहीम किल्याची ऐतिहासिक माहिती :

• महिकावती नावाच्या प्राचीन मध्ययुगीन ग्रंथात या किल्ल्याचा उल्लेख आहे.

प्रतापराजे बिंब याने आपल्या जुन्या महिकावती राजधानीस सुरक्षेसाठी शत्रू पासून रक्षण व्हावे यासाठी या ठिकाणी महिकावती नदीच्या किनारी खाडीच्या बाजूला हा किल्ला इसवी सन ११ व्या शतकात बांधला.

• पुढे मुस्लिम आक्रमण आल्यावर गुजरातचा सुलतान याने हा किल्ला आपल्या ताब्यात घेतला.

• इसवी सन १५१६ मध्ये पोर्तुगीज अधिकारी टॉम होमाबे मोनो याने हा किल्ला जिंकून घेतला.

• त्यानंतर वारंवार गुजरात सुलतान अली शहा व पोर्तुगीज यात संघर्ष होत राहिला.

• इसवी सन १५३४ साली हा किल्ला संपूर्ण पोर्तुगीज सत्तेच्या अमलाखाली आला.

• इसवी सन १६६१ साली पोर्तुगीज राजकन्येचा विवाह इंग्लंडच्या चार्ल्स दुसरा याच्याशी झाला. तिला हुंडा म्हणून मुंबई बंदर दिले. त्यापासून हा किल्ला मुंबई बंदरासोबत इंग्रजी सत्तेच्या अमलाखाली आला.

• इंग्रज स्थापत्य विशारद जेरॉल्ड ऑगियर याने या किल्याची तटबंदी मजबूत केली. तसेच दरवाजे , आतील कक्ष, प्रार्थनास्थळ बांधले. तसेच बुरुज भक्कम केले. सध्या आतील बांधकाम नष्ट झाले आहे.

• इसवी सन १६७२ साली ब्रिटिश व पोर्तुगीज यांमध्ये बिनसले. तेव्हा मुंबई बंदर व हा किल्ला ताब्यात घेण्यासाठी पोर्तुगीजांनी हल्ला केला. तेव्हा येथे १०० सैन्य व तीस तोफा होत्या. पोर्तुगीजांना हा किल्ला जिंकता आला नाही.

• इसवी सन १४ फेब्रुवारी १६८९ साली जंजिऱ्याच्या सिद्दी याकूब खान याने येथे २५०० सैन्य घेऊन हल्ला केला. व माहीम ताब्यात घेतले. व प्रचंड लुटालुट केली.

• पुढे इंग्रजांनी हा किल्ला पुन्हा ताब्यात घेतला.

• १५ ऑगस्ट १९४७ रोजी भारत स्वतंत्र झाल्यावर हा किल्ला स्वतंत्र भारत सरकारच्या ताब्यात आला.

• पुढे या परिसरात अतिक्रमण झाले होते. अत्यंत गलिच्छ वातावरण होते. सध्या अतिक्रमण हटवून किल्याच्या अस्तित्वासाठी पुरातत्व खाते झटत आहे.

व पर्यटन विकास केला जात आहे.

• अशी आहे.महिम किल्ल्याची माहिती / mahim Fort information


माहिम किला 1/ Mahim Fort1

माहिम किला (Mahim Fort) – इतिहास, घूमने की पूरी जानकारी, वास्तुकला और कैसे पहुँचें माहिम किला (Mahim Fort)  मुंबई के सबसे प्राचीन और ऐतिहासि...