crossorigin='anonymous' src='https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1553308877182847'/> महाराष्ट्र किल्ले व स्थळे यांची माहिती Forts and places in maharashtra: जून 2026

रविवार, २८ जून, २०२६

Mohandari Fort / Shidaka Fort, Nashik


Mohandari Fort / Shidaka Fort, Nashik

Mohandari Fort / Shidaka Fort, Nashik


• Location:

Mohandari Fort, also known as Shidaka Fort, is situated near Mohandari village, close to Nanduri village in the Satmala Mountain Range, near the famous Saptashrungi Fort in Nashik district, Maharashtra, India.

How to Reach:

From Mumbai or Pune, travel to Nashik and then take the Saputara Road to Vani. From Vani, proceed towards Nanduri–Abhone Road. Mohandari village is about 3.5 km from Nanduri. From the village, the fort can be reached by trekking for approximately 1 to 1.5 hours.

There are several routes to reach the fort from Mohandari village.

- After reaching the famous natural rock arch (Nidhe), cross to the other side. The valley lies on the right and the fort on the left. Following this trail, the fort can be reached in about one and a half hours.

- Another route leads through a natural rocky gorge on the eastern side of the hill, allowing access to the fort from its eastern end.

- A rope ladder installed near the Nidhe can also be used to climb to the fort.

Mohandari Fort / Shidaka Fort, Nashik

Mohandari Fort / Shidaka Fort, Nashik


Places to Visit on Mohandari Fort

• Hero Stones (Virgal)

Near Nanduri, while approaching Mohandari, several Hero Stones (Virgal) can be seen. These memorial stones were erected in honor of warriors who died bravely in battles. Three more Hero Stones can be seen near the Mohandari junction.

• Nidhe (Natural Rock Arch)

Mohandari Fort / Shidaka Fort, Nashik


After leaving Mohandari village and following the trail, trekkers reach the famous Nidhe, a natural rock arch.

This geological formation was created over thousands of years in volcanic basalt rock. Softer layers of rock gradually eroded due to wind and weather, leaving behind a large natural opening while the harder rock remained intact. This unique formation is locally known as Nidhe.

• Local Legend

According to local folklore, when Goddess Saptashrungi appeared to slay the demon Mahishasura, he fled in the form of a buffalo. While chasing him across Mohandari Hill, the Goddess struck the mountain with her foot, creating the large hole seen today. Local people believe this natural arch was formed by that divine strike.

• Fortification and Bastions

The fort stands on steep and inaccessible cliffs. Most of its fortification walls have disappeared over time. Only a few remains of bastions can be seen near the rocky gorge.

Mohandari Fort / Shidaka Fort, Nashik

Mohandari Fort / Shidaka Fort, Nashik


• Water Cisterns

While walking from the western end towards the east, two silted-up rock-cut water cisterns can be seen.

Mohandari Fort / Shidaka Fort, Nashik

Mohandari Fort / Shidaka Fort, Nashik


• Structural Remains

A little further uphill, the foundation remains of ancient buildings can still be observed.

• Three Water Cisterns

Further ahead are three more rock-cut water cisterns. Water is available in them but is not fit for drinking.

• Summit Plateau

The fort has a broad plateau at the top. From here, visitors can enjoy panoramic views of Ahivant Fort to the west, Kanher Fort to the east, Saptashrungi, Markandeya, Ravlya, Jawlya, and Dhodap Forts to the south, and Abhone village along with Mohandari village at the foothills to the north.

Mohandari Fort / Shidaka Fort, Nashik


History of Mohandari Fort

Mohandari Fort is one of the important watch forts in the Satmala Mountain Range and forms part of a chain of around 18 forts in this region.

During the medieval period, the Yadavas, Sultanate rulers, Mughals, and Marathas used this fort to maintain control over the surrounding region. It was strategically built to monitor important trade routes and keep watch over the nearby territories.

The Hero Stones found in the surrounding area indicate that many brave warriors sacrificed their lives here during various power struggles.

Today, agriculture and trade flourish in the surrounding region, but the fort has gradually fallen into neglect. Only archaeological remains and traces of its glorious past survive.

• Accommodation:

Visitors may stay at the Ashram School in Mohandari village after obtaining permission from the local authorities.

• Food Facility:

Food is available in Nanduri village.

• Water Facility:

Water is available in the rock-cut cisterns on the fort; however, it is not suitable for drinking.

This is the information about Mohandari Fort (Shidaka Fort), Nashik, Maharashtra.

मोहनदरी किला / शिडका किला (नासिक) Mohandari Fort / Shidaka Fort, Nashik

 

मोहनदरी किला / शिडका किला (नासिक)
Mohandari Fort / Shidaka Fort, Nashik

मोहनदरी किला / शिडका किला (नासिक)    Mohandari Fort / Shidaka Fort, Nashik


• स्थान :

महाराष्ट्र राज्य के नासिक जिले में, सप्तशृंगी गढ़ के आसपास सातमाला पर्वतमाला में नांदुरी गाँव के समीप मोहनदरी गाँव के पास मोहनदरी किला स्थित है। इसे शिडका किला भी कहा जाता है।

किले तक पहुँचने का मार्ग :

मुंबई या पुणे से नासिक पहुँचने के बाद सापुतारा रोड पर स्थित वणी गाँव जाएँ। वहाँ से नांदुरी–अभोणे मार्ग पर लगभग 3.5 किलोमीटर दूर मोहनदरी गाँव है। यहाँ से पैदल लगभग 1 से 1.5 घंटे में किले तक पहुँचा जा सकता है।

मोहनदरी गाँव से किले पर जाने के लिए कई मार्ग उपलब्ध हैं।

- निढे (प्राकृतिक छिद्र) के पास पहुँचकर दूसरी ओर निकलें। दाईं ओर गहरी घाटी और बाईं ओर किला दिखाई देता है। इस पगडंडी से लगभग डेढ़ घंटे में किले पर पहुँचा जा सकता है।

- मोहनदरी गाँव से किले के पूर्वी भाग की ओर स्थित पहाड़ी की प्राकृतिक घळ (दरार) से चढ़कर पूर्वी छोर से भी किले पर पहुँचा जा सकता है।

- निढे के पास लगी हुई रोप-सीढ़ी (Rope Ladder) की सहायता से भी किले पर चढ़ा जा सकता है।

मोहनदरी किला / शिडका किला (नासिक)    Mohandari Fort / Shidaka Fort, Nashik

मोहनदरी किला / शिडका किला (नासिक)    Mohandari Fort / Shidaka Fort, Nashik


मोहनदरी किले पर देखने योग्य स्थान :

• वीरगल

मोहनदरी की ओर जाते समय नांदुरी के आसपास कई वीरगली (वीर स्मारक शिलाएँ) देखने को मिलती हैं, जो युद्ध में वीरगति प्राप्त हुए योद्धाओं की स्मृति में बनाई गई थीं। मोहनदरी फाटे के पास भी तीन वीरगली देखने को मिलती हैं।

• निढे (प्राकृतिक छिद्र)

मोहनदरी किला / शिडका किला (नासिक)    Mohandari Fort / Shidaka Fort, Nashik


मोहनदरी गाँव से पैदल चलते हुए निढे तक पहुँचा जाता है।

अग्निजन्य चट्टानों में समय के साथ कठोर और मुलायम चट्टानों का निर्माण हुआ। हवा और वर्षा के प्रभाव से मुलायम चट्टानें धीरे-धीरे घिस गईं और वहाँ एक बड़ा प्राकृतिक छिद्र बन गया, जबकि कठोर चट्टान शेष रह गई। इस प्राकृतिक संरचना को निढे कहा जाता है।

• स्थानीय लोककथा

मान्यता है कि जब सप्तशृंगी देवी महिषासुर का वध करने के लिए प्रकट हुईं, तब महिषासुर भैंसे का रूप धारण करके भागने लगा। वह मोहनदरी पर्वत पार कर गया। देवी ने उसे पकड़ने के लिए यहाँ अपने पैर से प्रहार किया, जिससे इस पर्वत में छेद हो गया। स्थानीय लोग इस प्राकृतिक छिद्र को उसी घटना से जोड़ते हैं।

• प्राचीर एवं बुर्ज

ऊँची और दुर्गम चट्टानों पर बने इस किले की अधिकांश प्राचीर नष्ट हो चुकी है। केवल घाटी के समीप कुछ बुर्जों के अवशेष दिखाई देते हैं।

मोहनदरी किला / शिडका किला (नासिक)    Mohandari Fort / Shidaka Fort, Nashik

मोहनदरी किला / शिडका किला (नासिक)    Mohandari Fort / Shidaka Fort, Nashik



• जल टंकियाँ

पश्चिमी छोर से पूर्व दिशा की ओर जाते समय दो मिट्टी से भरी हुई प्राचीन जल टंकियाँ दिखाई देती हैं।

• प्राचीन निर्माण अवशेष

थोड़ा ऊपर चढ़ने पर प्राचीन इमारतों की नींव और निर्माण के अवशेष दिखाई देते हैं।

• तीन जल टंकियाँ

आगे बढ़ने पर तीन और जल टंकियाँ मिलती हैं। इनमें पानी तो है, लेकिन पीने योग्य नहीं है।

मोहनदरी किला / शिडका किला (नासिक)    Mohandari Fort / Shidaka Fort, Nashik


• विस्तृत पठार

किले के ऊपर विस्तृत समतल भाग है। यहाँ से पश्चिम दिशा में आहिवंतगढ़, पूर्व में कन्हेर, दक्षिण में सप्तशृंगी, मार्कंडेय, रवळ्या, जावळ्या, धोडप तथा उत्तर दिशा में अभोणे और पायथ्य में मोहनदरी गाँव दिखाई देते हैं।

मोहनदरी किले का इतिहास

मोहनदरी किला सातमाला पर्वतमाला में स्थित एक महत्वपूर्ण चौकी (टेहळणी) किला था। यह इस क्षेत्र के लगभग 18 किलों की श्रृंखला का हिस्सा है।

मध्यकाल में यादव, सुल्तानशाही, मुगल तथा मराठा शासकों ने इस किले का उपयोग अपने सामरिक नियंत्रण को बनाए रखने के लिए किया। यह किला व्यापारिक मार्गों की निगरानी तथा आसपास के क्षेत्र पर नियंत्रण रखने के उद्देश्य से बनाया गया था।

आसपास पाई जाने वाली वीरगली इस बात का प्रमाण हैं कि सत्ता संघर्षों में अनेक वीर योद्धाओं ने यहाँ अपने प्राण न्योछावर किए।

वर्तमान में इस क्षेत्र में कृषि और व्यापारिक गतिविधियाँ होती हैं, लेकिन समय के साथ इस किले की उपेक्षा होती गई। आज यहाँ केवल ऐतिहासिक और पुरातात्विक अवशेष ही शेष हैं।

• ठहरने की व्यवस्था :

मोहनदरी गाँव की आश्रमशाला में स्थानीय अनुमति लेकर ठहरा जा सकता है।

• भोजन की व्यवस्था :

भोजन की सुविधा नांदुरी गाँव में उपलब्ध है।

• पानी की व्यवस्था :

किले की जल टंकियों में पानी उपलब्ध है, लेकिन वह पीने योग्य नहीं है।

मोहनदरी किला / शिडका किला (नासिक)    Mohandari Fort / Shidaka Fort, Nashik

मोहनदरी किला / शिडका किला (नासिक)    Mohandari Fort / Shidaka Fort, Nashik


यह थी नासिक के मोहनदरी / शिडका किले की संक्षिप्त जानकारी।mohandari fort shidaka fort 

मोहंनदरी किल्ला / शिडका किल्ला माहिती मराठी मध्ये Mohandari fort/ shidaka fort nashik.

 मोहंनदरी किल्ला / शिडका किल्ला माहिती मराठी मध्ये
Mohandari fort/ shidaka fort nashik.

मोहंनदरी किल्ला / शिडका किल्ला माहिती मराठी मध्ये  Mohandari fort/ shidaka fort nashik.


स्थान : 

महाराष्ट्र राज्यातील नाशिक जिल्ह्यात सप्तशृंगी गडाच्या परिसरात सातमाळा डोंगर रांगेत नांदुरी गावाजवळ मोहनदरी गावाजवळ मोहनदरी किल्ला आहे. याला सिडकाचा किल्ला आहे.


किल्ल्याकडे जाण्यासाठी प्रवासी मार्ग :

• मुंबई किंवा पुणे येथून नाशिक येथे आल्यावर सापुतारा रोडवर - वणी हे गाव आहे. तेथून – नांदुरी अभोने रोडवर मोहनदरी गाव ३.५ किलोमीटर तेथून पायी चालत एक ते दीड तासात किल्यावर जाऊ शकतो.

• मोहनदरी गावातून गडावर जाण्यासाठी मार्ग आहेत.

• मोहनदारी गावातून गडाच्या निढ्याजवळ आल्यावर पलीकडे जाऊन उजव्या हाताला दरी तर डावीकडे किल्ला त्या पायवाटेने आपण दीड तासात गडावर पोहोचू शकतो.

• मोहनदरी गावातून किल्याच्या पूर्व बाजूस असलेल्या पूर्व टोकाकडे किल्याच्या डोंगर बाजूस असलेल्या घळीतून चढून पूर्व टोकाकडून गडावर जाऊ शकतो.

• मोहनदरी गावातून निढे तेथे बाजूला रोप सीडी आहे त्यावर चढून गडावर जाऊ शकतो.

मोहंनदरी किल्ला / शिडका किल्ला माहिती मराठी मध्ये  Mohandari fort/ shidaka fort nashik.

मोहंनदरी किल्ला / शिडका किल्ला माहिती मराठी मध्ये  Mohandari fort/ shidaka fort nashik.


मोहनदरी किल्यावर पाहण्यास योग्य ठिकाणे :

• मोहनदरीकडे येताना नांदुरी जवळ परिसरात वीरगळी पहायला मिळते. जी ऐतिहासिक काळात लढाईमध्ये मरण पावलेल्या वीरांच्या प्रतिके आहेत. तसेच मोहनदरी फाट्यावर परिसरात तिन वीरगळी पहायला मिळतात.

मोहनदरी गावात आल्यावर पाय वाटेने अंदाज घेत. आपण निढें असलेल्या ठिकाणी जाऊन पोहोचतो.

• निढें : 

 अग्निजन्य खडकात काळाच्या ओघात कठीण खडकात मृदू खडकाची निर्मिती झालेली दिसून येते. ही काळाच्या ओघात वाऱ्याच्या माऱ्याने मृदु खडकाची झीज होते. व मृदू ठिसूळ भाग बाजूला पडून तेथे छिद्र तयार होते. व कठीण भाग शिल्लक राहतो. त्यास निढे असे म्हणतात.

मोहंनदरी किल्ला / शिडका किल्ला माहिती मराठी मध्ये  Mohandari fort/ shidaka fort nashik.


• स्थानिक अख्यायिका :

सप्तशृंगी देवी जेव्हा महिषासुराचा वध करण्यास प्रकट झाली. तेव्हा ती त्याच्या मागे लागली. तो रेड्याचे रुप घेऊन धावू लागला. मोहनदरी डोंगर पार करुन गेला. त्याला पकडताना देवीने या ठिकाणी लाथेचा प्रहार केला. त्यातून या डोंगरास छिद्र पडले असे मानले जाते.

• तटबंदी बुरुज : 

उंच बेलाग कडे असलेल्या या किल्यावर तटबंदी ही नामशेष झाली आहे. तसेच बुरुजाचे थोडेफार बांधकाम घळीच्या ठिकाणी अवशेष रुपात आहे.

• पाण्याची टाकी : 

पश्चिम टोकाकडून पूर्वेस जाताना दोन मुजलेली टाकी पाहायला मिळतात.

मोहंनदरी किल्ला / शिडका किल्ला माहिती मराठी मध्ये  Mohandari fort/ shidaka fort nashik.

मोहंनदरी किल्ला / शिडका किल्ला माहिती मराठी मध्ये  Mohandari fort/ shidaka fort nashik.


• बांधकाम ज्योती अवशेष :

थोड वर चढून गेल्यावर आपल्याला बांधकाम केलेल्या वास्तूंचे पायाभूत अवशेष पाहायला मिळतात.

मोहंनदरी किल्ला / शिडका किल्ला माहिती मराठी मध्ये  Mohandari fort/ shidaka fort nashik.


• तिन पाण्याची टाकी :

तेथून वर चढून गेल्यावर तीन पाण्याची टाकी पाहायला मिळतात. त्यातील पाणी हे पिण्यायोग्य नाही.

मोहंनदरी किल्ला / शिडका किल्ला माहिती मराठी मध्ये  Mohandari fort/ shidaka fort nashik.


• विस्तृत घाट माथा :

• गडाच्या वरील भागात आपल्याला विस्तृत घाट माथा पाहायला मिळतो. येथून आपल्याला पश्चिमेस आहिवंतगड, पूर्वेस कण्हेर , दक्षिण बाजूला सप्तशृंगी, मार्कंडेय , रवळ्या, जावळ्या, धोडप, उत्तरेस अभोणे गाव पायथ्याशी मोहनदरी गाव दिसते.

मोहनदरी किल्याची ऐतिहासिक माहिती :

• मोहनदारी किल्ला हा सातमाळा डोंगर रांगेतील असून हा या परिसरात असलेल्या १८ किल्याच्या रांगेतील एक टेहळणी किल्ला आहे. या किल्यावर यादव, सुलतानशाही, मुघल, मराठा शासकांनी मध्ययुगीन काळात आपले अस्तित्व टिकवून ठेवण्यासाठी प्रयत्न केले. तत्कालीन व्यापारी वाटेवर टेहळणी व ताबा ठेवण्यासाठी तसेच स्थानिक परिसरावर नियंत्रण ठेवण्यासाठी या गडाची निर्मिती झाल्याचे प्रथमदर्शी ओळखते. परिसरात आढळणाऱ्या विरगळी पाहून अनेक पराक्रमी वीर पुरुष या ठिकाणी सत्ता संघर्षात बळी पडल्याचे समजते. सध्या या परिसरात मोठ्या प्रमाणात व्यापारी व अन्नधान्य शेती केली जाते. काळाच्या ओघात या किल्ल्याकडे दुर्लक्ष होत गेल्याचे जाणवते. आता फक्त ऐतिहासिक पुरातत्वीय अवशेष शिल्लक आहेत.


• राहण्याची सोय : 

मोहनदारी गावी असलेल्या आश्रमशाळेत स्थानिक परवानगी घेऊन राहू शकतो.

• जेवणाची सोय :

 नांदुरी गावात आपल्या जेवणाची सोय होऊ शकते.

• पाण्याची सोय :

गडावरील टाक्यांमध्ये पाणी आहे. पण ते पिण्यायोग्य नाही.

अशी आहे मोहनदरी / शिडका किल्याच्या विषयी माहिती.Mohandari/ shidaka fort in nashik.


सोमवार, २२ जून, २०२६

भिवगड / भीमगड किले की जानकारी bhivgad/ bhimgad kille ke bare me jankari hindi me

 भिवगड / भीमगड किले की जानकारी/ bhivgad/ bhimgad kille ke bare me jankari hindi me 

भिवगड / भीमगड किले की जानकारी bhivgad/ bhimgad kille ke bare me jankari hindi me


• स्थान : 

महाराष्ट्र राज्य के रायगढ़ जिले में स्थित कर्जत शहर से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर भिवगड/भीमगड किला स्थित है।


• ऊँचाई : 

इस किले की औसत ऊँचाई लगभग 785 फीट है।


किले तक पहुँचने का मार्ग

• मुंबई से रायगढ़ जिले के कर्जत शहर पहुँचने के बाद, वहाँ से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित वदप गाँव के पास तथा उससे लगभग 1 किलोमीटर दूर स्थित गौरकामत गाँव के निकट भिवगड/भीमगड किला स्थित है।


भिवगड/भीमगड किले पर देखने योग्य स्थान

• स्वराज्यकाल के कम परिचित किलों में भिवगड/भीमगड किले का नाम लिया जाता है। कर्जत के निकट स्थित वदप गाँव से ढाक भैरी जाने वाले मार्ग पर एक अलग पगडंडी से इस किले तक पहुँचा जा सकता है। वदप गाँव से आगे लगभग 1 किलोमीटर दूर गौरकामत गाँव के पास भी यह किला स्थित है। वदप और गौरकामत दोनों गाँवों से किले तक जाया जा सकता है, लेकिन गौरकामत मार्ग अपेक्षाकृत अधिक सुविधाजनक माना जाता है।

• चपटदान मारुति मंदिर

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• गौरकामत गाँव में स्थित मारुति मंदिर के पास बने मैदान में वाहन खड़ा करके किले की ओर प्रस्थान किया जा सकता है। इस सुंदर मंदिर में सिंदूर से अलंकृत मारुति (हनुमान) की प्रतिमा देखने को मिलती है।

• पानी का टैंक

• आगे सीढ़ियों के पास एक जलाशय (पानी का टैंक) देखने को मिलता है।

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• सीढ़ी मार्ग

• आगे चढ़ाई करने पर पत्थरों से बनी सीढ़ियाँ दिखाई देती हैं। ये सीढ़ियाँ काफी हद तक खंडित हो चुकी हैं और अब केवल चट्टानी मार्ग ही दिखाई देता है। इसके बाद एक संकरी घाटी (घळ) के पास पहुँचा जाता है। घाटी में ऊपर जाने वाली सीढ़ियाँ नष्ट हो जाने के कारण चढ़ाई करते समय काफी सावधानी और मेहनत करनी पड़ती है।

• गुफाएँ और कक्ष

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• घाटी पार करने के बाद चट्टान को काटकर बनाई गई दो गुफाएँ दिखाई देती हैं। माना जाता है कि इनका उपयोग पहरेदारों के निवास हेतु किया जाता था। इन गुफाओं के भीतर बने कक्ष भी देखने योग्य हैं।

• वीर शिल्प

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• एक गुफा के बाहर एक वीर योद्धा की शिल्पाकृति देखने को मिलती है। यह शिल्प घोड़े पर सवार एक शस्त्रधारी योद्धा का है, जिसकी स्थानीय लोग पूजा करते हैं। इसके पास ही एक शैलकृत गुफा अर्थात भुयारी (भूमिगत) गुफा भी है। इस गुफा के अंदर चमगादड़ देखने को मिलते हैं।

• भग्न द्वार

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घाटी में आगे बढ़ने पर एक स्थान पर ऐसे अवशेष दिखाई देते हैं, जो किसी प्राचीन द्वार के रहे होंगे, लेकिन अब वहाँ उसका कोई स्पष्ट भाग शेष नहीं है।

• शैलकृत जल टैंक

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आगे बढ़ने पर चट्टान को काटकर बनाया गया एक जल टैंक दिखाई देता है। इसे भुयारी टैंक अथवा अर्चना टैंक कहा जाता है। इस टैंक से एक नाली (चर) निकाली गई है, जिससे अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके। यहाँ का पानी पीने योग्य माना जाता है।

आगे ऊपर चढ़ने पर दो रास्ते दिखाई देते हैं। बाईं ओर जाने वाले मार्ग पर प्राचीन इमारतों के चबूतरों (जोतों) के अवशेष देखने को मिलते हैं।

• चूना घानी

किले पर तटबंदी, आवासीय भवनों तथा अन्य संरचनाओं के निर्माण के लिए चूना तैयार किया जाता था। इसके लिए उपयोग में लाई जाने वाली चूना पीसने की घानी के अवशेष यहाँ देखने को मिलते हैं।

• पानी की टंकियाँ

भिवगड / भीमगड किले की जानकारी bhivgad/ bhimgad kille ke bare me jankari hindi me

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ऊपरी भाग में और भी कई जल टंकियाँ देखने को मिलती हैं। इनमें से एक खंभा टैंक के नाम से प्रसिद्ध है। किले पर वर्षभर पानी की आवश्यकता पूरी करने के लिए वर्षा जल संग्रहण हेतु इन टंकियों को चट्टानों में खोदा गया होगा।

• बालेकिला

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किले का सबसे ऊँचा भाग बालेकिला कहलाता है। यहाँ अनेक प्राचीन इमारतों के अवशेष दिखाई देते हैं। इस स्थान से सोंडाई, माथेरान, ईर्शालगढ़ और प्रबळगढ़ के सुंदर दृश्य देखे जा सकते हैं।

भिवगड का ऐतिहासिक महत्व

• यह किला मुख्य रूप से सैन्य गतिविधियों तथा व्यापारिक घाट मार्गों की निगरानी के लिए बनाया गया था।

• सातवाहन, शिलाहार, राष्ट्रकूट और यादव जैसे हिंदू राजवंशों के साथ-साथ बहमनी, निजामशाही और मुगल शासनकाल में भी यह किला महत्वपूर्ण रहा। बाद में यह छत्रपति शिवाजी महाराज के स्वराज्य का हिस्सा बना।

• पेशवाई के पतन के बाद यह किला ब्रिटिश शासन के अधीन चला गया।

• सन् 1818 में अन्य मराठा किलों की तरह अंग्रेजों ने भी इस किले पर अधिकार कर लिया। किले तक पहुँचने वाली पत्थर की सीढ़ियों को नष्ट कर दिया गया, ताकि भविष्य में मराठे पुनः विद्रोह न कर सकें।

इस प्रकार भिवगड / भीमगड किले का इतिहास, स्थापत्य और प्राकृतिक सौंदर्य इसे रायगढ़ जिले के महत्वपूर्ण किंतु अपेक्षाकृत कम प्रसिद्ध किलों में स्थान दिलाता है।

भिवगड / भीमगड किले की जानकारी/ bhivgad/ bhimgad kille ke bare me jankari hindi me

Bhivgad / Bhimgad Fort Information

 Bhivgad / Bhimgad Fort Information

Bhivgad / Bhimgad Fort Information


Location

Bhivgad, also known as Bhimgad Fort, is situated in the Raigad district of Maharashtra, about 10 kilometers from Karjat town.

Height

The fort stands at an average elevation of approximately 785 feet above sea level.

How to Reach the Fort

From Mumbai, one must first reach Karjat in Raigad district. Bhivgad/Bhimgad Fort is located near Vadap village, around 10 kilometers from Karjat, and close to Gaurkamat village, which is about 1 kilometer from Vadap.

Places to See on Bhivgad / Bhimgad Fort

Bhivgad/Bhimgad is one of the lesser-known forts of the Swarajya period. From Vadap village, which is the base village for the trek to Dhak Bahiri, a separate trail leads to Bhivgad Fort. The fort can be accessed from both Vadap and Gaurkamat villages, although the route from Gaurkamat is more convenient.

Chapatdan Maruti Temple

Bhivgad / Bhimgad Fort Information


Visitors can park their vehicles in the open ground near the Maruti Temple in Gaurkamat village and begin the trek from there. The temple houses a beautiful idol of Lord Maruti (Hanuman) covered with vermilion (sindoor).

Water Cistern

Bhivgad / Bhimgad Fort Information


Further along the route, near the steps, a rock-cut water cistern can be seen.

Stone Steps Route

As the climb continues, visitors come across a series of stone steps. Most of these steps are now in a ruined condition, and only rocky patches remain visible along the path. Beyond this point, the trail reaches a narrow gorge. Since the steps leading through the gorge have been destroyed, trekkers must carefully negotiate the climb.

Caves and Chambers

Bhivgad / Bhimgad Fort Information

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After climbing through the gorge, two caves carved into the rock can be seen on one side. These caves were likely used as shelters for guards stationed at the fort. Inner chambers can also be observed inside these caves.

Hero Stone (Veer Shilp)

Bhivgad / Bhimgad Fort Information


Outside one of the caves stands a hero stone depicting a warrior riding a horse and carrying weapons. Local villagers worship this warrior figure. Nearby, there is also a rock-cut cave or underground chamber. Bats can often be seen inside this cave.

Ruined Gateway

Bhivgad / Bhimgad Fort Information


As you proceed further through the gorge, you can see some remains that appear to have belonged to a fort gateway. However, no significant structure of the gateway survives today.

Rock-Cut Water Cistern

Bhivgad / Bhimgad Fort Information


Further ahead, there is a water cistern carved into the rock. This cistern is known as the Underground Cistern (Bhuyari Take) or Archana Tank. A drainage channel has been carved from the cistern to allow excess water to flow out. The water stored here is considered potable.

After climbing further up, the trail splits into two paths. Taking the left path leads to the remains of ancient building foundations.

Lime Grinding Pit

The fort contains a lime-grinding pit that was used to prepare lime mortar for construction. The lime was utilized in building the fortifications, residential structures, administrative buildings, and other constructions on the fort.

Water Cisterns

Bhivgad / Bhimgad Fort Information

Bhivgad / Bhimgad Fort Information

Bhivgad / Bhimgad Fort Information


Several more water cisterns can be found on the upper section of the fort. One of them is a pillar cistern. These cisterns were probably excavated to collect and store rainwater during the monsoon season to meet the fort's water requirements throughout the year.

Balekilla (Citadel)

Bhivgad / Bhimgad Fort Information


The highest part of the fort forms the Balekilla (Citadel). Here, visitors can see the remains of several ancient structures and foundations. From this point, beautiful views of Sondai Fort, Matheran, Irshalgad, and Prabalgad can be enjoyed.

Historical Information about Bhivgad

Bhivgad Fort was primarily constructed for military surveillance and to monitor the important trade routes passing through the mountain ghats.

The fort remained under the control of several dynasties, including the Hindu kingdoms of the Satavahana Dynasty, Shilahara Dynasty, Rashtrakuta Dynasty, and Yadava Dynasty. Later, it came under the rule of the Bahmani Sultanate, Nizam Shahi, and the Mughal Empire, before becoming part of the Swarajya established by Chhatrapati Shivaji Maharaj.

After the decline of the Maratha Confederacy and the end of the Peshwa rule, the fort came under British control.

In 1818, after capturing the fort, the British destroyed the stone stairway leading to the fort, as they did with many other forts, to prevent future Maratha uprisings and rebellions.

Thus, Bhivgad (Bhimgad) Fort stands as an important yet lesser-known hill fort of Maharashtra, reflecting a rich military and historical heritage.

Bhivgad / Bhimgad Fort Information

भिवगड / भीमगड किल्ल्याची माहिती मराठी भाषेत Bhivgad / bhimgad kilyachi mahiti marathi madhe

 भिवगड / भीमगड किल्ल्याची माहिती मराठी भाषेत
Bhivgad / bhimgad kilyachi mahiti marathi madhe

भिवगड / भीमगड किल्ल्याची माहिती मराठी भाषेत  Bhivgad / bhimgad kilyachi mahiti marathi madhe


• स्थान : 

महाराष्ट्र राज्यातील रायगड जिल्ह्यात कर्जत या शहरापासून जवळच १० किलोमीटर अंतरावर भिवगड/ भीमगड आहे.

• उंची : 

 या किल्याची सरासरी उंची ही ७८५ फूट आहे.

किल्ल्याकडे जाण्यासाठी प्रवासी मार्ग :

• मुंबई या आंतरराष्ट्रीय ठिकाणा पासून रायगड जिल्यातील कर्जत येथे आल्यावर तेथून १० किलोमीटर अंतरावर असलेल्या वदप गावाजवळ तसेच तेथून जवळ १ किलोमीटर अंतरावर असलेल्या गौरकामत गावाजवळ भिवगड/ भीमगड किल्ला आहे.

भिवगड/ भीमगड किल्यावर पाहण्यास योग्य ठिकाणे :

स्वराज्यातील अपरिचित किल्ल्यामध्ये भिवगड/ भीमगड किल्ला ओळखला जातो. कर्जत येथून जवळ असलेल्या वदप गावी जेथून आपण ढाक भैरीला जातो. तिथून वाटेला फुटलेल्या एका वाटेने आपण भिवगडावर जाऊ शकतो. वदप गावी आल्यावर तेथून पुढे एक किलोमीटर अंतरावर असलेल्या गौरकामत गावाजवळ भिवगड आहे. वदप व गौरकामत या दोन्ही गावातून किल्यावर जाता येते. मात्र गौरकामत मार्गे जाणे सोयीचे आहे.

• चपटदान मारुती मंदीर :

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गौरकामत या गावी असलेल्या मारुती मंदिराजवळ असलेल्या मैदानावर गाडी पार्क करुन किल्ल्याकडे जाऊ शकतो. येथील सुंदर मारुती मंदिरात शेंदूर लावलेली मूर्ती पहायला मिळते.

• पाणी टाके : पुढे पायरीजवळ एक पाण्याचे टाके पाहायला मिळते.

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• पायरी मार्ग :

पुढे आपल्याला चढून गेल्यावर पायऱ्या लागतात. त्या भग्न झालेल्या आहेत. व आता वाटेत खडक फक्त दिसून येतात. येथून पुढे घळी जवळ येऊन पोहोचतो.

घळी चढून जाणाऱ्या पायऱ्या नष्ट झाल्याने आपल्याला चढताना कसरत करावी लागते.

• गुहा खोल्या :

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घळ चढून आपण आल्यावर बाजूला कातळात दोन खोदून तयार केलेल्या गुहा दिसून येतात. या पहारेकऱ्यांना राहण्यासाठी खोदल्या असाव्यात.

यामध्ये अंतर्गत दालने पहायला मिळतात.

• वीर शिल्प : 

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एका गुहेच्या बाहेर आपल्याला वीराचे शिल्प पाहायला मिळते. जो घोड्यावर स्वार झालेला शस्त्र धारी योद्धा याची पूजा स्थानिक लोक करतात. बाजूस एक कातळ लेणी म्हणजेच भुयारी गुहा आहे. आतमध्ये वटवाघळे पहायला मिळतात

• भग्न दरवाजा :

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• घळीत पुढे आपल्याला एके ठिकाणी असे अवशेष पाहायला मिळतात की जे एका दरवाजाचे असावेत पण आता तिथे काही शिल्लक नाही.

• कातळ पाणी टाके :

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पुढे आपल्याला एक खडकात खोदलेले पाण्याचे टाके लागते. या टाक्यास भुयारी टाके. किंवा अर्चना टाके असे म्हणतात. या टाक्या मधून एक चर खोदलेली आहे. ज्यातील ज्यादा झालेले पाणी बाहेर काढण्यासाठी योजना आहे. येथील पाणी पिण्यायोग्य आहे.

पुढे वर चढून गेल्यावर आपल्याला दोन वाटा लागतात. डाव्या बाजूने पुढे गेल्यावर जोत्याचे अवशेष पाहायला मिळतात.

• चुना घाणी :

गडावर तटबंदी तसेच इतर निवासी वास्तू, सदर बांधण्यासाठी अनेक सखल भागातील दगड काढून बांधकाम करण्यासाठी सांधण्यास लागणारा चुना बनवण्याची घाणी लागते.

• पाण्याच्या टाक्या :

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वरील बाजूस आणखी पाण्याच्या टाक्या पहायला मिळतात. त्यापैकी एक खांब टाके आहे. गडावरील पाण्याची गरज भागवण्यासाठी पावसाळ्यात पावसाचे पाणी साठवण्यासाठी या टाक्या खोदल्या असाव्यात.

• बालेकिल्ला :

गडाचा उंच भाग हा बालेकिल्ल्याचा असून येथे आपल्याला अनेक वास्तूंचे ज्योती अवशेष पाहायला मिळतात. तसेच येथून सोंडाई, माथेरान, ईर्शाळगड, प्रबळगड पाहता येतो.

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भिवगडाची ऐतिहासिक माहिती :

• हा किल्ला विशेषत लष्करी मोहिमेत व व्यापारी घाट मार्गावर टेहळणी करण्यासाठी बांधलेला किल्ला आहे.

• सातवाहन, शिलाहार, राष्ट्रकुट, यादव या हिंदू तसेच बहामनी, निजामशाही, मुघल, या इस्लामी राजवटीत व पुढे शिवरायांच्या स्वराज्यात हा किल्ला होता.

• पुढे पेशवाई अस्तानंतर हा किल्ला ब्रिटिश सत्तेच्या ताब्यात हा किल्ला गेला.

• इसवी सन १८१८ साली इतर किल्ल्याप्रमाणे हा किल्ला इंग्रजांनी जिंकून घेतल्यावर चढणीचा पायरी मार्ग फोडून काढला. कारण पुन्हा मराठ्यांनी विद्रोह करू नये यासाठी.

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• अशी आहे भिवगड / भीमगड किल्याची माहिती मराठी भाषेत Bhivgad / bhimgad kilyachi mahiti marathi madhe

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