crossorigin='anonymous' src='https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1553308877182847'/> महाराष्ट्र किल्ले व स्थळे यांची माहिती Forts and places in maharashtra: वैराटगढ़ किले की जानकारी (हिंदी में)Veratgad kille ke bare me jankari hindi me

बुधवार, १७ जून, २०२६

वैराटगढ़ किले की जानकारी (हिंदी में)Veratgad kille ke bare me jankari hindi me

 वैराटगढ़ किले की जानकारी (हिंदी में)Veratgad kille ke bare me jankari hindi me 

वैराटगढ़ किले की जानकारी (हिंदी में)Veratgad kille ke bare me jankari hindi me


स्थान :

महाराष्ट्र राज्य के सातारा जिले में वाई के निकट सह्याद्री पर्वतमाला की शंभू महादेव उपश्रेणी में रायरेश्वर पठार से शिखर शिंगणापुर तक रायरेश्वर पठार, केंजलगढ़, पांडवगढ़, मांढरदेवी, वारुगढ़, संतोषगढ़ तथा शिखर शिंगणापुर स्थित हैं। इन्हीं में कृष्णा नदी के दक्षिण में वाई नगर की रक्षा हेतु निर्मित दुर्ग को वैराटगढ़ किला कहा जाता है।

ऊँचाई :

वैराटगढ़ किले की औसत ऊँचाई लगभग 1200 मीटर अर्थात 4000 फुट है।


वैराटगढ़ किले तक कैसे पहुँचें?

- पुणे यहाँ का निकटतम अंतरराष्ट्रीय शहर है।

- सड़क मार्ग से पुणे–कोल्हापुर राजमार्ग पर सातारा जिले के पाचवड गाँव के पास वैराटगढ़ स्थित है।

स्थानीय मार्ग :

1. उत्तर दिशा से मार्ग :

   पाचवड से व्याजवाडी गाँव के रास्ते वैराटगढ़ पहुँचा जा सकता है। यह मार्ग काफी खड़ी चढ़ाई वाला है।

2. गणेशवाडी मार्ग :

   किले के दक्षिण में स्थित गणेशवाडी गाँव से आने वाला मार्ग अपेक्षाकृत सुविधाजनक है।

किले पर देखने योग्य स्थान :

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गणेशवाडी गाँव तक निजी वाहन अथवा बस से पहुँचा जा सकता है। वहाँ पहुँचने पर एक सूचना फलक दिखाई देता है। उसके निकट कुछ समाधियाँ देखने को मिलती हैं। वहीं स्थित मैदान में वाहन खड़ा कर किले की ओर प्रस्थान किया जा सकता है।

थोड़ी दूरी पर एक विशाल वटवृक्ष दिखाई देता है। इसी वटवृक्ष के पास से जाने वाले पगडंडी मार्ग से किले की चढ़ाई शुरू होती है। रास्ते में शेंदूर से सुशोभित म्हसोबा देव का स्थान दिखाई देता है। उसके पीछे एक धनगर (चरवाहा) की झोपड़ी है। वहाँ से मुख्य द्वार की ओर जाते समय ऊँची-ऊँची चट्टानें और कड़े दिखाई देते हैं।

• गडदा अर्थात भूमिगत जलाशय :

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घने वृक्षों के बीच से आगे बढ़ते हुए हम किले की प्राचीर (कगार) तक पहुँचते हैं। कगार के नीचे की ओर चट्टानों को काटकर बनाई गई भूमिगत पानी की टंकियाँ दिखाई देती हैं। मान्यता है कि ये पाँच टंकियाँ पाँच पांडवों का प्रतीक हैं तथा इन्हें उन्हीं ने बनवाया था। स्थानीय लोग इन्हें "गडदा" कहते हैं।

यहाँ से थोड़ा ऊपर चढ़ने पर खंबाटकी घाट, व्याजवाडी, वाई क्षेत्र तथा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 4 का सुंदर दृश्य दिखाई देता है।

• चट्टानों को काटकर बनाया गया सीढ़ी मार्ग :

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इसके आगे चट्टानों को काटकर बनाया गया सीढ़ीनुमा मार्ग मिलता है। इस मार्ग से चलते हुए कई स्थानों पर बुरुजों के चारों ओर घूमते हुए मुख्य द्वार के पास पहुँचा जा सकता है।

• मुख्य द्वार :

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समय के साथ किले का मुख्य द्वार नष्ट हो चुका है। उसके समीप एक विशाल वटवृक्ष उग आया है। दोनों ओर की देवड़ियाँ (प्रहरी कक्ष) भी खंडित अवस्था में हैं। उनकी दीवारों और नींव के अवशेष आज भी देखे जा सकते हैं। नीचे की ओर द्वार की चौखट (उंबरा) के अवशेष दिखाई देते हैं।

• शिव स्मारक एवं हनुमान मंदिर :

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किले पर एक स्थान पर खुले वातावरण में स्थापित हनुमानजी की प्रतिमा देखने को मिलती है। उसके पास एक साधारण कौलारू (टाइलों की छत वाला) मंदिर है। यहाँ छत्रपति शिवाजी महाराज तथा हनुमानजी की प्रतिमाएँ स्थापित हैं। हनुमानजी को वीरता, शक्ति और संकटों का नाश करने वाले देवता माना जाता है, इसलिए प्राचीन काल से ही किलों पर उनकी पूजा की जाती रही है।

• जलकुंड (पानी के तालाब) :

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किले के मध्य भाग में एक-दूसरे के निकट स्थित तीन गहरे जलकुंड दिखाई देते हैं, जिन्हें चट्टानों को काटकर बनाया गया है। इन जलकुंडों से निकाले गए पत्थरों का उपयोग मंदिर, देवड़ी तथा अन्य निर्माण कार्यों में किया गया था। खुदाई से बने इन कुंडों में वर्षा जल का संचयन किया जाता था। जलकुंडों के समीप स्थित वृक्षों के नीचे शेंदूर से सुशोभित देवस्थान भी देखने को मिलते हैं।

• विराटेश्वर मंदिर :

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जलकुंडों से थोड़ी दूरी पर किले के आराध्य देव विराटेश्वर का साधारण पत्थर निर्मित मंदिर स्थित है। इसके सामने टीन की छत वाला सभा मंडप है तथा भीतर प्राचीन गर्भगृह है। मंदिर के बाहर वीरगलों (वीर स्मारक शिलाएँ) और सतीशिलाएँ देखने को मिलती हैं। गर्भगृह में शिवलिंग अर्थात विराटेश्वर विराजमान हैं। यहाँ कछुए की प्रतिमा, नंदी तथा यज्ञकुंड भी है। इस मंदिर में अभयगिरी महाराज निवास करते थे तथा उनके शिष्य भी यहाँ रहते थे।

• यमाई मंदिर :

किले पर प्राचीन अवस्था में स्थित यमाई देवी का मंदिर भी देखने को मिलता है।

• वीरगळ (वीर स्मारक शिला) :

युद्ध अथवा किसी अन्य प्रकार की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त करने वाले वीरों की स्मृति में वीरगळ (वीर शिला) स्थापित की जाती है। यदि किसी वीर पुरुष की पत्नी उसके साथ सती हो जाती थी, तो उसकी स्मृति में सतीगळ (सती शिला) स्थापित की जाती थी। मंदिर के निकट ऐसी वीरगळ और सतीगळ आज भी देखने को मिलती हैं।

• चोर मार्ग (गुप्त रास्ता) :

किले के पश्चिमी भाग में एक गुप्त मार्ग (चोरवाट) दिखाई देता है। यह मार्ग फिसलन भरा तथा कठिन है।

• खड़ी चट्टानें, बुर्ज और तटबंदी :



किले के चारों ओर ऊँची और सीधी खड़ी चट्टानें (ताशीव कड़े) हैं, जो प्राकृतिक पत्थर की दीवार का कार्य करती हैं। इनमें कई स्थानों पर बुर्ज जैसी घुमावदार संरचनाएँ दिखाई देती हैं।

• सोंड (संकीर्ण भाग) :

किले के एक ओर सूँड के समान एक संकीर्ण एवं लंबा भाग दिखाई देता है।

• पुरातात्त्विक अवशेष :

किले पर उत्खनन के दौरान पाटा-वरवंटा (पीसने का पत्थर), पत्थर की समई (दीपक), ओखली, धातु का हंडा तथा अन्य प्राचीन वस्तुएँ प्राप्त हुई हैं।

• तटबंदी :

किले का पूर्व-पश्चिम विस्तार काफी बड़ा है तथा यहाँ लगभग 17 फुट ऊँची पत्थर की तटबंदी देखने को मिलती है।

वैराटगढ़ किले का इतिहास

• निर्माण :

वैराटगढ़ किले का निर्माण शिलाहार वंश के राजा भोज द्वारा ईस्वी सन् 1178 से 1193 के बीच कराया गया था।

• यादव एवं मुस्लिम शासन :

इसके बाद कुछ समय तक यह किला यादवों, सुल्तानशाही, बहमनी सत्ता तथा बाद में आदिलशाही के अधीन रहा।

• छत्रपति शिवाजी महाराज का स्वराज्य :

वाई क्षेत्र के अन्य किलों को जीतते समय छत्रपति शिवाजी महाराज ने वैराटगढ़ किले को भी अपने अधिकार में ले लिया था।

• विराट नगर का उल्लेख :

संस्कृत कवि परमानंद द्वारा रचित शिवभारत काव्य में इस वाई क्षेत्र का उल्लेख "विराट नगर" के रूप में किया गया है।

• औरंगज़ेब का अधिकार :

मुगल सम्राट औरंगज़ेब ने सन् 1699 में इस किले पर अधिकार कर लिया और इसका नाम "सर्जागढ़" रख दिया।

• पेशवा एवं ब्रिटिश काल :

बाद में यह किला पेशवाओं के शासन में रहा तथा पेशवाई के पतन के पश्चात ब्रिटिश सत्ता के अधीन चला गया।

निष्कर्ष

वैराटगढ़ किला सातारा जिले का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक दुर्ग है। इसकी प्राचीन वास्तुकला, जल व्यवस्था, मंदिर, वीर स्मारक तथा गौरवशाली इतिहास इसे इतिहासप्रेमियों और दुर्गभ्रमण करने वालों के लिए एक आकर्षक स्थल बनाते हैं।इसी प्रकार वैराटगढ़ किले की यह संपूर्ण जानकारी है।

वैराटगढ़ किल्ले की जाणकारी हिंदी मे Veratgad kille ke bare me jankari hindi me

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