केलवे माहिम किला (पालघर माहिम का किला) | इतिहास, घूमने की जानकारी और प्रमुख दर्शनीय स्थल
केलवे माहिम किला महाराष्ट्र के पालघर जिले का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक समुद्री किला है। यह किला अपने समृद्ध इतिहास, मजबूत वास्तुकला और मराठा, पुर्तगाली तथा बिंब राजवंश से जुड़े गौरवशाली अतीत के लिए प्रसिद्ध है। आज यह भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित ऐतिहासिक धरोहर है। यदि आप पालघर घूमने की योजना बना रहे हैं तो केलवे माहिम किला अवश्य देखें।
स्थान
केलवे माहिम किला महाराष्ट्र राज्य के पालघर जिले में केलवे गांव के समीप माहिम गांव में, केलवे केंद्र विद्यालय के पास स्थित है। किले की बाहरी प्राचीर (तटबंदी) काफी हद तक नष्ट हो चुकी है, लेकिन इसका बालेकिला (मुख्य दुर्ग) आज भी सुरक्षित अवस्था में मौजूद है।
केलवे माहिम किले तक कैसे पहुँचें?
मुंबई से वसई रोड होते हुए ढेकळे गांव, तांदुळवाड़ी मार्ग के माध्यम से केलवे गांव और फिर माहिम पहुंचकर इस किले तक पहुँचा जा सकता है।
- मुंबई तथा वसई रोड रेलवे स्टेशन भारत के प्रमुख शहरों से रेल एवं सड़क मार्ग द्वारा जुड़े हुए हैं।
- मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे निकट का प्रमुख एयरपोर्ट है।
- प्रसिद्ध केलवे बीच इस किले के निकट स्थित होने के कारण यहाँ पर्यटन का विशेष आकर्षण है।
केलवे माहिम किले में देखने योग्य स्थान
तटबंदी
किले के चारों ओर बनी विशाल तटबंदी अब अधिकांश स्थानों पर टूट चुकी है। वर्तमान में केवल इसके अवशेष ही देखने को मिलते हैं।
बालेकिला प्रवेश द्वार
मुख्य बालेकिला आज भी अच्छी स्थिति में है। इसमें प्रवेश के लिए एक छोटा द्वार है, जहाँ आज भी पुराना लोहे का दरवाजा देखा जा सकता है।
विशाल प्रांगण एवं कुआँ
अंदर प्रवेश करने पर चारों ओर ऊँची दीवारें तथा बीच में खुला प्रांगण दिखाई देता है। सामने सीढ़ियाँ हैं तथा पास में एक प्राचीन कुआँ स्थित है, जिसका पानी वर्तमान में उपयोग योग्य नहीं है।
अंग्रेजी अक्षर "Y" आकार की सीढ़ियाँ
किले के भीतर अंग्रेजी अक्षर Y के आकार की अनोखी सीढ़ियाँ बनी हुई हैं, जिनसे मध्य भाग तथा ऊपरी मंजिल तक पहुँचा जा सकता है।
कोठार
सीढ़ियों के समीप दीवारों में बनी बड़ी-बड़ी कोठारें दिखाई देती हैं। इनका उपयोग अनाज, बारूद तथा सैनिकों के रहने के लिए किया जाता था।
सैनिक बराक
दीवारों के किनारे बरामदे जैसी संरचनाएँ दिखाई देती हैं, जो सैनिकों के रहने के लिए बनाई गई थीं।
. दो मंजिला सभा कक्ष
ऊपर जाने पर एक विशाल दो मंजिला कक्ष दिखाई देता है। लकड़ी की मूल संरचना नष्ट हो चुकी है, लेकिन सुंदर खिड़कियाँ (गवाक्ष) आज भी इसकी भव्यता का परिचय देती हैं। माना जाता है कि यह सभा भवन या सामूहिक बैठक के लिए उपयोग किया जाता था।
प्राचीर, जंग्या और तोपों के स्थान
ऊपरी भाग में चारों ओर घूमने के लिए मार्ग बनाया गया है। यहाँ दुश्मनों पर नजर रखने तथा बंदूक और तोप चलाने के लिए विशेष जंग्या और तोप रखने के स्थान बनाए गए हैं।
. जलाशय
किले के दक्षिण-पश्चिम दिशा में एक छोटा तालाब स्थित है।
. विशाल वटवृक्ष
बालेकिले के बाहर एक प्राचीन और विशाल वटवृक्ष पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करता है।
. भवानी मंदिर
किले के उत्तर दिशा में स्थित नया भवानी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख धार्मिक स्थल है।
केलवे माहिम किले का इतिहास
- लगभग 1240–1241 ईस्वी में बिंब राजवंश के राजा प्रतापसिंह बिंब ने उत्तर कोंकण में दमण से वाळकेश्वर तक अपना राज्य स्थापित किया और माहिम किले का निर्माण कराया।
- बाद में सरदार भिमराव ने इस क्षेत्र पर अधिकार स्थापित किया।
- 14वीं शताब्दी में गुजरात सल्तनत ने इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया।
- 1534 ईस्वी में पुर्तगालियों ने इस किले पर अधिकार कर लिया।
- 1684 ईस्वी में छत्रपति संभाजी महाराज ने इस किले पर आक्रमण किया, लेकिन औरंगज़ेब के स्वराज्य पर आक्रमण के कारण यह अभियान बीच में रोकना पड़ा।
- 9 जनवरी 1739 को केलवे माहिम किला मराठा साम्राज्य के अधिकार में आ गया।
- 1818 तक यह किला मराठा शासन के अधीन रहा, इसके बाद अंग्रेजों के कब्जे में चला गया।
- 1862 तक यह ठाणे जिले के कलेक्टर का निवास स्थान रहा।
- 15 अगस्त 1947 को भारत की स्वतंत्रता के बाद यह किला भारत सरकार के अधिकार में आया।
- वर्तमान में यह भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित ऐतिहासिक स्मारक है।
निष्कर्ष
केलवे माहिम किला पालघर जिले की ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। इसका गौरवशाली इतिहास, प्राचीन स्थापत्य कला, विशाल बालेकिला और मराठा-पुर्तगाली संघर्ष की यादें इसे इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण बनाती हैं। यदि आप पालघर या केलवे बीच घूमने जाएँ, तो इस ऐतिहासिक किले का अवश्य भ्रमण करें।
Kelve Mahim Fort Information in Hindi | Kelwe Mahim Fort Palghar









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