crossorigin='anonymous' src='https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1553308877182847'/> महाराष्ट्र किल्ले व स्थळे यांची माहिती Forts and places in maharashtra: बेडसे लेणी (Bedsa Leni) – हिंदी माहिती

सोमवार, १६ फेब्रुवारी, २०२६

बेडसे लेणी (Bedsa Leni) – हिंदी माहिती

 बेडसे लेणी (Bedsa Leni) – हिंदी माहिती

बेडसे लेणी (Bedsa Leni) – हिंदी माहिती


स्थान :

महाराष्ट्र राज्य के पुणे ज़िले के मावल तालुका में हमें बेडसे लेणी देखने को मिलती हैं।

ऊँचाई :

बेडसे लेणी (Bedsa Leni) – हिंदी माहिती


इन लेणियों की ऊँचाई समुद्र तल से लगभग 2250 फीट है।

जबकि पहाड़ के पायथ्य से लगभग 300 फीट की ऊँचाई पर बेडसे लेणी स्थित हैं।

लेणी देखने जाने का यात्रा मार्ग :

ये लेणियाँ पुणे ज़िले में स्थित हैं। पुणे महाराष्ट्र का एक अंतरराष्ट्रीय शहर है।

मुंबई भी एक अंतरराष्ट्रीय शहर है।

पुणे से सड़क तथा रेल मार्ग द्वारा कामशेत स्थान पर पहुँचने के बाद, पवना बाँध की ओर जाने वाले रास्ते पर बेडसे गाँव स्थित है।

इस गाँव के पीछे की ओर पहाड़ में हमें बेडसे लेणी देखने को मिलती हैं।

मुंबई की ओर से आते समय लोणावला – खड़गाँव मार्ग से दुधारी खिंड, वहाँ से पवना मार्ग द्वारा हम बेडसे गाँव पहुँच सकते हैं।

दूरी :

पुणे से बेडसे : 50 किलोमीटर

मुंबई से बेडसे : 108 किलोमीटर

बेडसे लेणी में देखने योग्य स्थान :

बेडसे गाँव पहुँचने के बाद गाँव के पीछे स्थित पहाड़ के नीचे बने सीढ़ी मार्ग के पास तक वाहन द्वारा जाया जा सकता है।

निर्मित सीढ़ी मार्ग :

सीढ़ी मार्ग के पास पहुँचने पर पत्थर से बनी सीढ़ियों वाला रास्ता मिलता है।

कुल मिलाकर लगभग 400 सीढ़ियाँ हैं।

इस मार्ग से लेणियों की ओर चढ़ते समय रास्ते में जगह-जगह पानी के झरने देखने को मिलते हैं।

ये झरने वर्षा ऋतु में पूरे वेग से बहते हैं।

जबकि गर्मियों में ये कम हो जाते हैं या सूख जाते हैं।

ये लेणियाँ प्राचीन व्यापार मार्ग पर खोदी गई हैं।

ये लेणियाँ लगभग 2200 से 2300 वर्ष पुरानी हैं।

इस मार्ग से ऊपर चढ़ने के बाद हम लेणियों के पास पहुँचते हैं।

इन लेणियों को मारकूड की गुफाएँ भी कहा जाता है।

गुफा नंबर 1 :

बेडसे लेणी (Bedsa Leni) – हिंदी माहिती


यहाँ हमें एक अपूर्ण अवस्था में स्थित स्तूप और चैत्यगृह देखने को मिलता है।

इनकी खुदाई तो की गई, लेकिन इनकी सजावट और पूर्णता नहीं हो सकी।

दूसरी गुफा :

बेडसे लेणी (Bedsa Leni) – हिंदी माहिती


यहाँ हमें भूमिगत जल टंकी बनी हुई देखने को मिलती है।

यह तत्कालीन जल संचय की योजना के बारे में जानकारी देती है।

तीसरी गुफा :

बेडसे लेणी (Bedsa Leni) – हिंदी माहिती


यहाँ चैत्य और स्तूप बनाने का प्रयास किया गया है।

यहाँ ब्राह्मी लिपि में उत्कीर्ण अक्षर, अर्थात शिलालेख देखने को मिलता है।

स्तूप अपूर्ण है।

उस पर वेदिका पट्टी उत्कीर्ण की गई है।

इस स्तूप का शीर्ष भाग भी अपूर्ण अवस्था में है।

• गुफा क्रमांक 4 व 5:

बेडसे लेणी (Bedsa Leni) – हिंदी माहिती

बेडसे लेणी (Bedsa Leni) – हिंदी माहिती


इस स्थान पर पानी के लिए खोदे गए टांके (हौद) देखने को मिलते हैं। ये हौद लगभग दस से पंद्रह फीट गहरे तथा पर्याप्त रूप से विस्तृत हैं। पाँचवीं गुफा में एक शिलालेख भी देखने को मिलता है।

• चैत्यगृह और स्तूप:

बेडसे लेणी (Bedsa Leni) – हिंदी माहिती

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यहाँ एक विस्तृत और पूर्ण चैत्यगृह है। इसके प्रवेश द्वार पर चार स्तंभ दिखाई देते हैं। इनमें से दो पूर्णतः गोलाकार हैं तथा शेष दो दीवारों में तराशे गए हैं। ये अष्टकोणीय हैं। आधार भाग में वक्राकार गादी है, मध्य में अष्टकोणीय स्तंभ है और ऊपर की ओर उलटी (अधोमुखी) अवस्था में कमल पुष्प अंकित है। उसके ऊपर हरमिका (चौथरा) है, जिस पर पशु-शिल्प उकेरे गए हैं। इनमें विशेष रूप से अश्व, गज और बैल दिखाई देते हैं, जिन पर नर और नारी सवार हैं। उनका परिधान तत्कालीन जनजीवन और रहन-सहन की जानकारी देता है।

बेडसे लेणी (Bedsa Leni) – हिंदी माहिती

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इन स्तंभों की रचना मौर्यकालीन है तथा इनमें ईरानी अर्थात् पर्शियन शिल्प शैली का प्रभाव दिखाई देता है। स्तंभों पर उकेरे गए हाथियों के मुख में कभी वास्तविक दाँत (सूँड़ के पास दंत) थे, किंतु अब वे समाजकंटकों द्वारा चुरा लिए गए हैं। फिर भी हाथियों के मुख पर दंत-छिद्र स्पष्ट दिखाई देते हैं।

• बाह्य दीवार और चैत्य:

बेडसे लेणी (Bedsa Leni) – हिंदी माहिती

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स्तंभों को पार कर आगे बढ़ने पर पीपल के पत्ते के आकार में तराशी गई अर्धवृत्ताकार चैत्य दिखाई देती है। इसकी संरचना ऐसी है कि भीतर वातायन के समान खुला भाग रखा गया है, जिससे सूर्य किरणें भीतर पहुँच सकें। ऊपर सुंदर नक्काशी देखने को मिलती है। बाहरी ओर ध्यान कक्ष दिखाई देते हैं। उनके द्वारों पर सुंदर पीपल-पत्र आकृतियाँ हैं और ऊपर की ओर अलंकरण तथा नीचे वेदिका पट्टी दिखाई देती है। भीतर ध्यानस्थ बैठने के लिए आसन खोदे गए हैं।

• स्तूप:

बेडसे लेणी (Bedsa Leni) – हिंदी माहिती

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चैत्य के भीतर प्रवेश करने पर अंदर की ओर स्तूप दिखाई देता है। इसके दोनों ओर स्तंभ हैं, जिन पर पुष्प और धर्मचक्र की नक्काशी की गई है। कुल मिलाकर यहाँ 26 स्तंभ देखने को मिलते हैं। इन स्तंभों के पीछे की ओर एक छोटा मार्ग है, जो परिक्रमा पथ है। इस मार्ग से दोनों ओर बने द्वारों के माध्यम से परिक्रमा पूर्ण की जा सकती है।

मध्य में स्थित स्तूप के निचले भाग में जगती (ज्योत) है, उसके ऊपर थोड़ी दूरी छोड़कर वेदिका पट्टी, फिर गुंबद, उसके ऊपर मान, फिर हरमिका पट्ट और अंत में कमल-दंठ दिखाई देता है। यह अत्यंत पूर्णाकृति वाला स्तूप है। इसके ऊपर की लकड़ी की तख्तियाँ तथा अन्य सामग्री चोरी हो चुकी है। ऊपरी भाग में गजपृष्ठ आकृति दिखाई देती है।

इस स्थान पर बौद्ध धर्म के अरिहंत बुद्ध भिक्षुओं की अस्थियाँ रखी जाती थीं, जिससे यहाँ के वातावरण में शांति, तरलता और ऊर्जा का संचार होता था। यहाँ बौद्ध धर्म के त्रिरत्न, सूक्त तथा त्रिपिटक का पठन होता था। साथ ही बुद्ध तत्त्वज्ञान का तार्किक विवेचन भी भिक्षुओं को दिया जाता था। चैत्य और स्तूप की संरचना इस प्रकार की गई है कि ध्वनि पूरे परिसर में गूँज सके।

• गुफा क्रमांक 6:

इस स्थान पर पानी का एक हौद बनाया गया है।

बेडसे लेणी (Bedsa Leni) – हिंदी माहिती


• गुफा क्रमांक 7:

बेडसे लेणी (Bedsa Leni) – हिंदी माहिती


छठी गुफा से सटी हुई अपूर्ण गुफा क्रमांक सात दिखाई देती है। यहाँ बैठने के लिए ओटे बनाए गए हैं। कुछ अपूर्ण कक्ष भी हैं। इसके साथ ही एक भूमिगत जल-टंकी भी खोदी गई है।

• गुफा क्रमांक 8:

बेडसे लेणी (Bedsa Leni) – हिंदी माहिती


यह गुफा अपूर्ण है और यह एक अधूरा ध्यान कक्ष है।

• विहार:

आगे की गुफा एक विहार है। इसका आकार गजपृष्ठ (हाथी की पीठ) के समान है। बाहर की ओर पानी की टंकी है, उसके बाद बैठक है और फिर एक विस्तृत प्रांगण है। भीतर की ओर अनेक छोटी-छोटी कक्षाएँ खोदी गई हैं। कुल मिलाकर 11 कक्ष हैं। प्रत्येक कक्ष के द्वार पर पीपल-पत्र आकृति की नक्काशी और वेदिका पट्टी दिखाई देती है। अंदर ध्यान-आसन, विश्राम-स्थल तथा नीचे सामग्री रखने के लिए स्थान बनाया गया है।

बेडसे लेणी (Bedsa Leni) – हिंदी माहिती


• इसके बाद:

ऊपरी भाग में जाने के लिए चट्टान में सीढ़ीनुमा मार्ग खोदा गया है। उसके पास एक ध्यान कक्ष है और उसके बगल में पानी की टंकी खोदी गई है। ऊपर से बहता हुआ पानी इस टंकी में एकत्र होता है, जो पूरे वर्ष भर पर्याप्त रहता है।

बेडसे लेणी (Bedsa Leni) – हिंदी माहिती


• बेडसे लेण्यांविषयी ऐतिहासिक माहिती (हिंदी में):

बेडसे लेणी (Bedsa Leni) – हिंदी माहिती


• बेडसे लेणी का अवलोकन करते समय कुछ शिलालेख प्राप्त होते हैं।

• इनमें से एक शिलालेख इस प्रकार है –

“नसिकातो अनदस सेठीस पुतस पुसण कस दान”

• अर्थ: नाशिक के श्रेष्ठी आनंद के पुत्र द्वारा इन लेण्याओं का दान दिया गया था।

• ये लेणियाँ ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी से पहली शताब्दी के बीच खोदी गई हैं।

• ये बौद्ध धर्म से संबंधित लेणियाँ हैं।

• यह क्षेत्र सह्याद्री पर्वतमाला के मावळ प्रांत में स्थित होने के कारण बाहरी आक्रमणों से सुरक्षित रहा।

• संपूर्ण भारत में पूर्ण अवस्था में स्थित चैत्य और स्तूप यहाँ देखने को मिलते हैं।

• 26 मई 1909 को भारत सरकार ने इन लेण्याओं को महाराष्ट्र राज्य के संरक्षित स्मारक के रूप में घोषित किया।

• स्वतंत्रता-पूर्व काल में, ब्रिटिश शासन के दौरान मुंबई प्रांत के गवर्नर हेन्री कर्ज़न ने इस स्थान का दौरा किया था। उस समय सफाई के उद्देश्य से स्थानीय लोगों द्वारा दीवारों पर बनी चित्रकारी को खरोंच कर नष्ट कर दिया गया। जब यह बात हेन्री कर्ज़न को ज्ञात हुई, तो उन्हें अत्यंत दुःख हुआ।

• 15 अगस्त 1947 के बाद से यह स्थान स्वतंत्र भारत सरकार के अधीन है।

इस प्रकार, ये हैं बेडसे लेणी।

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